Why is Sea Water Salty: समुद्र का पानी खारा और नदियों का पानी मीठा क्यों होता है? जानिए इसके पीछे का विज्ञान

Updated on:

Follow Us

Why is Sea Water Salty: समुद्र का पानी खारा और नदियों का पानी मीठा क्यों होता है? जानिए इसके पीछे का असली विज्ञानआपने कभी सोचा है कि जिस पानी से नदियां भरती हैं, वही आखिर में समुद्र में जाकर मिलता है, फिर भी नदी का पानी पीने लायक होता है और समुद्र का नहीं? नदी में नमक नहीं चखा जाता, पर समुद्र में एक घूंट मुंह में चला जाए तो तुरंत थूकना पड़ता है। बात सुनने में उलझी लगती है, लेकिन इसका जवाब बहुत सीधा है और बारिश से शुरू होता है।

इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि समुद्र का पानी खारा क्यों होता है, नदियों का पानी मीठा क्यों होता है, समुद्र में नमक आया कहां से, क्या समुद्र हर साल और खारा होता जा रहा है, और कुछ झीलें समुद्र से भी ज़्यादा नमकीन क्यों होती हैं। आखिर में FAQ भी दिए हैं।

छोटा सा जवाब पहले

नदियां बारिश और बर्फ के पानी से बनती हैं और बहते-बहते चट्टानों और मिट्टी से बहुत थोड़ा सा नमक अपने साथ ले आती हैं। यह पानी समुद्र में जाकर रुक जाता है। समुद्र से पानी भाप बनकर उड़ता रहता है, पर नमक पीछे ही छूट जाता है। यह सिलसिला करोड़ों सालों से चल रहा है, इसलिए समुद्र में नमक जमा होता गया। नदी का पानी लगातार बहकर आगे निकल जाता है, इसलिए वहां नमक टिकता नहीं।

अब इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं।

नदी का पानी कहां से आता है?

पानी का एक पूरा चक्र चलता रहता है, जिसे जल चक्र कहते हैं। सूरज की गर्मी से समुद्र, तालाब और नदियों का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है। ऊपर जाकर यह ठंडा होता है और बादल बन जाता है। फिर यही बादल बारिश या बर्फ बनकर ज़मीन पर गिरते हैं।

यहां एक ज़रूरी बात है। जब पानी भाप बनता है, तो सिर्फ़ पानी ही ऊपर जाता है। उसमें घुला नमक या दूसरी चीज़ें पीछे रह जाती हैं। इसीलिए बारिश का पानी लगभग साफ़ होता है। यही बारिश पहाड़ों और ज़मीन पर गिरकर झरनों, छोटी धाराओं और फिर नदियों का रूप ले लेती है।

नदी के पानी में नमक कहां से आता है?

बारिश का पानी पूरी तरह शुद्ध नहीं होता। हवा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है, जो बारिश की बूंदों में थोड़ी सी घुल जाती है। इससे पानी हल्का अम्लीय हो जाता है। यह हल्का अम्ल चट्टानों पर असर करता है और उन्हें बहुत धीरे-धीरे घिसता है।

इस घिसाव से चट्टानों में मौजूद कैल्शियम, सोडियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे खनिज पानी में घुल जाते हैं। इस प्रक्रिया को अपक्षय कहा जाता है। नदी जब पहाड़ों और मैदानों से गुज़रती है, तो यही खनिज अपने साथ बहाकर ले चलती है। इसके अलावा नदी में मिट्टी, रेत और कई जगह इंसानी गतिविधियों से भी कुछ चीज़ें जुड़ जाती हैं।

लेकिन यह मात्रा बहुत कम होती है। दुनिया की नदियों के पानी में औसतन एक लीटर में करीब 0.1 ग्राम खनिज घुले होते हैं। इतनी कम मात्रा का स्वाद हमें महसूस ही नहीं होता, इसलिए हम इसे “मीठा पानी” कह देते हैं।

“मीठा पानी” का मतलब क्या है?

एक छोटी सी बात साफ कर दें। नदी का पानी चीनी की तरह मीठा नहीं होता। जब हम “मीठा पानी” कहते हैं, तो असल में हम यह कह रहे हैं कि इसमें नमक बहुत कम है और यह पीने लायक है। अंग्रेज़ी में इसे freshwater कहते हैं।

यह भी याद रखिए कि नदी का हर पानी सीधा पीने के लिए सुरक्षित नहीं होता। उसमें कीटाणु, गंदगी और प्रदूषण हो सकता है। बात सिर्फ़ नमक की हो रही है, साफ़-सफ़ाई की नहीं। पीने से पहले नदी या तालाब के पानी को साफ़ करना ज़रूरी है।

समुद्र में नमक इकट्ठा कैसे हुआ?

अब असली कहानी यहां से शुरू होती है। हर साल दुनिया भर की नदियां अरबों टन पानी और उसके साथ बहुत थोड़ा-थोड़ा नमक समुद्र में पहुंचाती हैं। समुद्र का कोई आगे का रास्ता नहीं है। पानी वहां से सिर्फ़ एक ही तरीके से बाहर निकल सकता है, यानी भाप बनकर उड़कर।

और जैसा हमने देखा, भाप बनते समय नमक साथ नहीं जाता। वह समुद्र में ही रह जाता है। फिर बारिश होती है, नदियां बहती हैं, थोड़ा और नमक समुद्र में पहुंचता है, पानी फिर भाप बनकर उड़ जाता है, और नमक फिर पीछे छूट जाता है।

इस तरह करोड़ों-अरबों सालों तक चलते-चलते समुद्र में नमक की मात्रा बढ़ती गई। यह कुछ वैसा ही है जैसे आप एक बर्तन में नमक वाला पानी उबालें। पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नमक बर्तन में बचा रहता है। समुद्र वही बड़ा सा बर्तन है, और सूरज उसका चूल्हा।

समुद्र का पानी कितना खारा होता है?

समुद्र के हर एक किलो पानी में औसतन करीब 35 ग्राम नमक और दूसरे खनिज घुले होते हैं, यानी लगभग 3.5 प्रतिशत। अगर इसकी तुलना नदी के पानी से करें, तो समुद्र का पानी करीब 300 गुना ज़्यादा खारा होता है।

इन घुले हुए पदार्थों में सबसे ज़्यादा हिस्सा क्लोराइड और सोडियम का है, जिनसे मिलकर हमारा खाने वाला नमक यानी सोडियम क्लोराइड बनता है। बाकी में मैग्नीशियम, सल्फेट, कैल्शियम और पोटैशियम शामिल हैं।

एक अनुमान के अनुसार, अगर समुद्र का सारा नमक निकालकर धरती की ज़मीन पर फैला दिया जाए, तो वह 150 मीटर से भी ज़्यादा मोटी परत बना देगा। इससे अंदाज़ा लगता है कि समुद्र में कितना नमक जमा है।

यह नमक पहली बार समुद्र में कहां से आया?

सिर्फ़ नदियों से नहीं, नमक के और भी स्रोत हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार शुरुआती धरती पर ज्वालामुखियों से बहुत सी गैसें निकलती थीं, जिनमें क्लोरीन से जुड़ी गैसें भी थीं। ये गैसें बारिश के पानी में घुलीं और समुद्र में पहुंचीं। इसी तरह समुद्र की तली में मौजूद ज्वालामुखी दरारों और गर्म झरनों से भी खनिज पानी में घुलते रहते हैं।

यानी समुद्र के नमक में दो तरह का योगदान है। एक तरफ़ नदियों के ज़रिए ज़मीन की चट्टानों का घुला हुआ हिस्सा आता रहा, और दूसरी तरफ़ ज्वालामुखियों और समुद्र की तली से निकले तत्व जुड़ते रहे। इसका पूरा हिसाब-किताब आज भी वैज्ञानिक अध्ययन का विषय है, लेकिन मोटे तौर पर यही कहानी मानी जाती है।

तो क्या समुद्र हर साल और खारा होता जा रहा है?

यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं, और जवाब है कि लगभग नहीं। नदियां नमक लाती रहती हैं, फिर भी समुद्र का खारापन बहुत लंबे समय से करीब-करीब एक जैसा बना हुआ है। वजह यह है कि नमक सिर्फ़ जुड़ता नहीं, बाहर भी निकलता है।

समुद्र में रहने वाले जीव अपने खोल और हड्डियां बनाने के लिए कैल्शियम और दूसरे तत्व पानी से लेते हैं। कुछ खनिज समुद्र की तली में मिट्टी के साथ जमकर परतों में दब जाते हैं। कई जगह उथले और गर्म समुद्री इलाकों में पानी सूखने पर नमक की मोटी परतें बन जाती हैं, जो बाद में ज़मीन के नीचे दब जाती हैं। इन सब तरीकों से नमक की मात्रा संतुलित रहती है।

यानी समुद्र में नमक आने और जाने का एक संतुलन बना हुआ है। इसी वजह से इंसानी इतिहास में समुद्र के खारेपन में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा।

सभी समुद्र एक जैसे खारे नहीं होते

समुद्र का औसत खारापन 3.5 प्रतिशत है, पर हर जगह यह बराबर नहीं होता। जहां गर्मी ज़्यादा है और बारिश या नदियों का पानी कम पहुंचता है, वहां भाप ज़्यादा बनती है और पानी ज़्यादा खारा हो जाता है। लाल सागर इसका एक उदाहरण है, जो दुनिया के सबसे खारे समुद्रों में गिना जाता है।

इसके उलट जहां बड़ी नदियां लगातार मीठा पानी डालती हैं या बर्फ पिघलती है, वहां पानी कम खारा होता है। बाल्टिक सागर में कई हिस्सों में खारापन बहुत कम है, कुछ जगह 1 प्रतिशत से भी कम। भारत में गंगा और ब्रह्मपुत्र के मुहाने के पास बंगाल की खाड़ी का पानी भी तुलनात्मक रूप से कम खारा रहता है।

कुछ झीलें समुद्र से भी ज़्यादा खारी क्यों होती हैं?

अब एक दिलचस्प सवाल। कई झीलों में नदियों का मीठा पानी ही आता है, फिर भी वे समुद्र से ज़्यादा खारी होती हैं। कारण है कि इन झीलों से पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं होता।

मृत सागर (Dead Sea) इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। नदियां इसमें पानी तो लाती हैं, पर वहां की तेज़ गर्मी में पानी भाप बनकर उड़ता रहता है और नमक रह जाता है। इसमें खारापन करीब 30 से 34 प्रतिशत तक माना जाता है, यानी समुद्र से लगभग नौ-दस गुना ज़्यादा। यही वजह है कि इसमें इंसान आसानी से तैरता है।

भारत में राजस्थान की सांभर झील भी इसी तरह की खारी झील है। यहां से लंबे समय से नमक बनाया जाता रहा है। इसी तरह गुजरात और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में समुद्र का पानी खुले खेतों में भरकर धूप में सुखाया जाता है, जिससे नमक बनता है। गुजरात देश में सबसे ज़्यादा नमक बनाने वाला राज्य है।

नदी का पानी खारा क्यों नहीं बनता?

अगर नदी में भी कुछ नमक आता है, तो वह खारी क्यों नहीं होती? क्योंकि नदी रुकती नहीं। वह लगातार बहती रहती है। पहाड़ से जो पानी और खनिज आए, वे आगे बहकर समुद्र की तरफ़ निकल जाते हैं। उनकी जगह नया बारिश का पानी आ जाता है। इसलिए नदी में नमक जमा होने का मौका ही नहीं मिलता।

समुद्र या बिना निकास वाली झील में पानी निकलने का रास्ता नहीं है, इसलिए वहां नमक जमा होता जाता है। यही सबसे बड़ा फर्क है।

समुद्र का पानी हम पी क्यों नहीं सकते?

समुद्र के पानी में नमक की मात्रा हमारे शरीर की सहनशक्ति से बहुत ज़्यादा होती है। हमारी किडनी खून से अतिरिक्त नमक निकालकर पेशाब के ज़रिए बाहर करती है, लेकिन वह पेशाब में समुद्र के पानी जितना नमक नहीं निकाल सकती। नतीजा यह होता है कि इस नमक को बाहर निकालने के लिए शरीर को पी गई मात्रा से भी ज़्यादा पानी खर्च करना पड़ता है। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और प्यास बुझने के बजाय और बढ़ जाती है। इसीलिए समुद्र में फंसे लोगों के लिए समुद्र का पानी पीना खतरनाक माना जाता है।

यह भी पढ़ें : Study Habits for Kids: बच्चों में पढ़ाई की अच्छी आदत कैसे डालें – माता-पिता के लिए पूरी गाइड

घर पर करके देखिए: नमक कैसे पीछे छूट जाता है

इस बात को खुद देखना चाहें तो एक आसान प्रयोग है, जो किसी बड़े की निगरानी में कीजिए। एक गिलास पानी में दो चम्मच नमक घोलिए। फिर उसे एक चौड़ी थाली में डालकर धूप में रख दीजिए। कुछ घंटों या एक दिन में पानी भाप बनकर उड़ जाएगा और थाली में सफेद नमक की परत बच जाएगी।

यही काम समुद्र बहुत बड़े पैमाने पर और बहुत धीरे-धीरे करता है। इस प्रयोग से बच्चे आसानी से समझ जाते हैं कि पानी उड़ता है, नमक नहीं।

FAQ: खारे और मीठे पानी से जुड़े सवाल

समुद्र का पानी खारा क्यों होता है?

नदियां चट्टानों से थोड़ा-थोड़ा नमक घोलकर समुद्र में लाती हैं। समुद्र से पानी भाप बनकर उड़ता है, पर नमक पीछे रह जाता है। करोड़ों सालों में यही नमक जमा होकर समुद्र को खारा बना देता है।

नदी का पानी मीठा क्यों होता है?

नदी का पानी लगातार बहता रहता है और उसमें नमक की मात्रा बहुत कम होती है। नमक जमा नहीं हो पाता, इसलिए पानी का स्वाद फीका यानी मीठा लगता है।

समुद्र के पानी में कितना नमक होता है?

औसतन हर एक किलो समुद्री पानी में करीब 35 ग्राम नमक और दूसरे खनिज घुले होते हैं, यानी लगभग 3.5 प्रतिशत।

क्या नदी के पानी में बिल्कुल नमक नहीं होता?

होता है, पर बहुत कम। औसतन एक लीटर नदी के पानी में करीब 0.1 ग्राम खनिज घुले होते हैं, जिनका स्वाद हमें महसूस नहीं होता।

क्या समुद्र हर साल और खारा होता जा रहा है?

नहीं। नदियां नमक लाती हैं, पर साथ ही कुछ नमक समुद्री जीवों, तली की परतों और दूसरी प्रक्रियाओं से बाहर भी निकलता रहता है। इसलिए समुद्र का खारापन लंबे समय से लगभग स्थिर है।

Laxmi Nautiyal

लक्ष्मी नौटियाल पिछले 5 सालों से कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें न्यूज, राजनीति, शिक्षा, मनोरंजन, खेल, बिजनेस और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वह इससे पहले कई वेबसाइट्स के लिए काम कर चुकी हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना है। वह हर विषय पर रिसर्च करके ऐसा कंटेंट लिखने की कोशिश करती हैं, जिसे पाठक आसानी से समझ सकें और जिससे उन्हें जरूरी जानकारी मिल सके।

For Feedback - khabar.bandhan@gmail.com

Leave a Comment

< PREV NEXT >