Mobile Battery Drain at Night: रात को फोन 90 प्रतिशत पर छोड़कर सोइए और सुबह उठने पर बैटरी 60 या 50 पर मिले, तो चिढ़ होना स्वाभाविक है। न कॉल की, न वीडियो देखा, फिर भी चार्ज कहां गया? रात में मोबाइल की बैटरी कम होना आज बहुत आम शिकायत है। इसके पीछे अक्सर कोई एक बड़ी खराबी नहीं होती। बैकग्राउंड ऐप्स, कमजोर नेटवर्क, गलत सेटिंग और पुरानी बैटरी जैसी छोटी वजहें मिलकर चार्ज खींचती रहती हैं। नीचे हर कारण को आसान भाषा में समझाया गया है, साथ में उसे पहचानने और ठीक करने का तरीका भी।
रात में फोन असल में सोता नहीं है
स्क्रीन बंद होने का मतलब यह नहीं कि फोन पूरी तरह बंद हो गया। अंदर प्रोसेसर, मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई और कई सिस्टम सेवाएं कम स्तर पर चलती रहती हैं, ताकि कॉल, मैसेज और नोटिफिकेशन आप तक पहुंचते रहें। अलार्म समय पर बजने की वजह भी यही है।
फोन बनाने वाली कंपनियां इस खपत को कम रखने के इंतजाम करती हैं। एंड्रॉइड में डोज़ मोड जैसी व्यवस्था है, जिसमें फोन काफी देर तक स्थिर पड़ा रहे तो ऐप्स की गतिविधि सीमित कर दी जाती है। आईफोन भी बैकग्राउंड में ऐप्स की गतिविधि को अपने तरीके से नियंत्रित करता है। लेकिन ये इंतजाम तभी ठीक से काम करते हैं, जब कोई ऐप या सेटिंग इन्हें बार-बार न तोड़े। रात में बैटरी ड्रेन की असली समस्या यहीं से शुरू होती है।
रात भर में कितनी बैटरी जाना सामान्य है?
थोड़ी बैटरी का जाना सामान्य है, क्योंकि फोन नेटवर्क से जुड़ा रहता है। इसके लिए कोई आधिकारिक या सर्वमान्य आंकड़ा नहीं है। व्यावहारिक रूप से आठ-नौ घंटे की नींद में कुछ प्रतिशत की गिरावट आम मानी जाती है। यह फोन के मॉडल, बैटरी की उम्र और नेटवर्क की हालत पर निर्भर करता है।
अगर रात में 20 या 30 प्रतिशत बैटरी चली जाती है, तो मान लीजिए कि कहीं कुछ गड़बड़ है। यह अंदाजा अनुभव पर आधारित एक मोटा पैमाना है, किसी कंपनी का तय किया हुआ आंकड़ा नहीं। इसलिए सबसे अच्छा तरीका अपने ही फोन का रिकॉर्ड देखना है। एक-दो रात ध्यान से देखिए कि सोते समय कितनी बैटरी थी और सुबह कितनी बची। अगर गिरावट हर रात लगभग एक जैसी है और अचानक बढ़ी नहीं है, तो समस्या शायद बैटरी की उम्र की है। अगर हाल ही में अचानक बढ़ी है, तो कोई नया ऐप, अपडेट या सेटिंग जिम्मेदार हो सकती है।
बैकग्राउंड में चलते ऐप्स
रात में बैटरी खर्च होने की सबसे आम वजह बैकग्राउंड ऐप्स हैं। सोशल मीडिया, मैसेजिंग, शॉपिंग, न्यूज और गेमिंग ऐप्स स्क्रीन बंद होने के बाद भी नया कंटेंट लाने, नोटिफिकेशन भेजने या लोकेशन जानने के लिए चलते रहते हैं। कुछ ऐप्स खराब तरीके से बने होते हैं और फोन को सोने ही नहीं देते। तकनीकी भाषा में इसे “वेक लॉक” कहते हैं, यानी ऐप फोन को जगाए रखता है।
ऐप को बार-बार बंद करने (रिसेंट ऐप्स से हटाने) से इसका खास फायदा नहीं होता। कई मामलों में ऐप को दोबारा शुरू करने में ज्यादा बैटरी लगती है। बेहतर तरीका यह है कि जिस ऐप को बैकग्राउंड में चलने की जरूरत नहीं, उसकी बैकग्राउंड गतिविधि सेटिंग से सीमित कर दी जाए। यह कैसे करना है, इसका तरीका आगे बताया गया है।
बैकग्राउंड रिफ्रेश और ऑटो-सिंक
ऑटो-सिंक चालू होने पर फोन ईमेल, कैलेंडर, कॉन्टैक्ट और कई ऐप्स का डेटा बार-बार सर्वर से मिलाता रहता है। अगर आपके फोन में चार-पांच ईमेल अकाउंट जुड़े हैं और हर अकाउंट छोटे अंतराल पर सिंक होता है, तो यह रात भर चलता रहता है।
आईफोन में इसका नाम “बैकग्राउंड ऐप रिफ्रेश” है। यह चालू हो तो ऐप्स बैकग्राउंड में अपना कंटेंट अपडेट करते रहते हैं। एंड्रॉइड में अलग-अलग ऐप के भीतर और अकाउंट सेटिंग में सिंक के विकल्प मिलते हैं। जो ऐप आप रोज इस्तेमाल नहीं करते, उनका सिंक बंद कर देने से रात की खपत में फर्क पड़ सकता है। कुछ ऐप्स में नोटिफिकेशन की जरूरत नहीं होती, फिर भी वे लगातार डेटा खींचते रहते हैं। ऐसे ऐप्स को पहचानकर उन पर रोक लगाइए।
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कमजोर नेटवर्क सिग्नल
यह कारण लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जब आपके घर में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होता है, तो फोन का रेडियो हिस्सा बार-बार सिग्नल ढूंढने की कोशिश करता है और इसमें सामान्य से ज्यादा बिजली लगती है। जिन घरों में सिग्नल सिर्फ एक बार या बीच-बीच में आता-जाता रहता है, वहां रात में बैटरी जल्दी उतरने की शिकायत ज्यादा सुनने को मिलती है।
अगर आपके घर में नेटवर्क कमजोर है और वाई-फाई उपलब्ध है, तो वाई-फाई कॉलिंग का विकल्प देखिए। यह सुविधा हर फोन और हर कंपनी के नेटवर्क पर नहीं मिलती, इसलिए अपने फोन की सेटिंग में जांच लें। कमजोर सिग्नल वाली जगह पर फोन को सोते समय एयरप्लेन मोड पर रखना भी एक रास्ता है, लेकिन इससे कॉल और मैसेज नहीं आएंगे। यह तभी ठीक है जब आपको रात में किसी इमरजेंसी कॉल की उम्मीद न हो।
वाई-फाई, ब्लूटूथ और लोकेशन का असर
वाई-फाई चालू रहे और राउटर से कनेक्शन ठीक हो, तो खपत अपेक्षाकृत कम रहती है। परेशानी तब होती है जब फोन बार-बार नेटवर्क खोजता है या सिग्नल कमजोर होने से कनेक्शन टूटता-जुड़ता रहता है।
ब्लूटूथ भी रात में चालू रहे तो स्मार्टवॉच, ईयरबड या किसी पुराने डिवाइस से जुड़ने की कोशिश करता रहता है। अगर आप रात में इनका इस्तेमाल नहीं करते, तो ब्लूटूथ बंद कर देना ठीक है।
लोकेशन सर्विस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। कई ऐप्स को “हमेशा” लोकेशन की अनुमति मिली होती है, जबकि उन्हें केवल इस्तेमाल के समय इसकी जरूरत होती है। ऐसे में ऐप बैकग्राउंड में आपकी लोकेशन पर नजर रखता है। हर ऐप की लोकेशन अनुमति जांचिए और जहां “हमेशा” है, वहां “ऐप इस्तेमाल करते समय” चुनिए। जिन ऐप्स को लोकेशन की जरूरत ही नहीं, उनसे यह अनुमति हटा दीजिए। यह निजता के लिए भी अच्छा है।
नोटिफिकेशन और स्क्रीन का बार-बार जागना
रात में आने वाला हर नोटिफिकेशन स्क्रीन जला सकता है, फोन को जगा सकता है और कभी-कभी वाइब्रेट भी कराता है। एक-दो नोटिफिकेशन से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन व्हाट्सऐप ग्रुप, सोशल मीडिया और शॉपिंग ऐप्स के सैकड़ों नोटिफिकेशन रात में आते रहें तो असर दिखता है।
इसके अलावा कुछ फोन में “उठाने पर स्क्रीन जलाएं” या “ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले” जैसे फीचर होते हैं। ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले में घड़ी या सूचनाएं स्क्रीन पर लगातार दिखती रहती हैं। यह सुविधा अच्छी है, लेकिन यह रात भर चलती रहे तो थोड़ी बैटरी लेती है, खासकर तब, जब फोन तकिए के पास रखा हो और करवट बदलने पर बार-बार स्क्रीन जल जाए। रात के लिए “डू नॉट डिस्टर्ब” या स्लीप मोड तय कर लेना अच्छा उपाय है। इससे नोटिफिकेशन शांत रहते हैं और स्क्रीन भी बार-बार नहीं जलती।
रात में अपने आप होने वाले अपडेट और बैकअप
कई फोन में ऐप अपडेट, सिस्टम अपडेट और क्लाउड बैकअप का समय रात का रखा जाता है, खासकर जब फोन चार्ज पर और वाई-फाई से जुड़ा हो। गूगल फोटोज, आईक्लाउड या कंपनी के अपने क्लाउड में हजारों फोटो-वीडियो का बैकअप चल रहा हो, तो प्रोसेसर और नेटवर्क दोनों व्यस्त रहते हैं। फोन गर्म भी होता है।
अगर फोन चार्जर से नहीं जुड़ा और ये काम बैटरी पर चल रहे हैं, तो चार्ज तेजी से घटता है। प्ले स्टोर में ऑटो-अपडेट को “सिर्फ वाई-फाई पर” रखा जा सकता है। फोटो बैकअप के लिए भी “सिर्फ चार्जिंग के समय” या “सिर्फ वाई-फाई पर” जैसे विकल्प देखिए। नया फोन लेने या बड़ी संख्या में फोटो जोड़ने के बाद शुरुआती कुछ दिन बैटरी ज्यादा खर्च होना सामान्य है, क्योंकि फोन सब कुछ व्यवस्थित कर रहा होता है।
बैटरी की उम्र और सेहत
कभी-कभी समस्या सेटिंग में नहीं, बैटरी में ही होती है। लिथियम-आयन बैटरी हर चार्ज-डिस्चार्ज के साथ धीरे-धीरे कमजोर होती है। दो-तीन साल पुराने फोन में, जो रोज इस्तेमाल होता है, बैटरी की क्षमता शुरुआती क्षमता से काफी कम हो सकती है। ऐसी बैटरी में 100 प्रतिशत दिखने पर भी असल में कम ऊर्जा होती है, इसलिए वह जल्दी खत्म होती है और कई बार प्रतिशत अचानक गिरता हुआ दिखता है।
आईफोन में सेटिंग्स में बैटरी के भीतर “बैटरी हेल्थ और चार्जिंग” का विकल्प मिलता है, जहां अधिकतम क्षमता प्रतिशत में दिखती है। कंपनी के बताए अनुसार जब बैटरी की क्षमता काफी घट जाती है, तो उसे बदलवाने की सलाह दी जाती है। एंड्रॉइड में यह सुविधा फोन के ब्रांड और मॉडल पर निर्भर करती है। कुछ ब्रांड सेटिंग में बैटरी हेल्थ दिखाते हैं, कुछ में सर्विस सेंटर के जरिए जांच करानी पड़ती है। अगर आपके फोन में यह जानकारी नहीं मिलती, तो अपने ब्रांड के अधिकृत सर्विस सेंटर में बैटरी की जांच कराइए।
सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी और नया अपडेट
कभी-कभी किसी सिस्टम अपडेट या किसी ऐप के नए वर्जन के बाद बैटरी अचानक तेजी से घटने लगती है। यह किसी बग यानी सॉफ्टवेयर की खामी की वजह से हो सकता है। इसकी पहचान यह है कि पहले सब ठीक चल रहा था और एक अपडेट के बाद से रात में ज्यादा चार्ज जाने लगा।
ऐसे में सबसे पहले फोन को एक बार रीस्टार्ट कीजिए। फिर देखिए कि सिस्टम या संबंधित ऐप का नया अपडेट उपलब्ध है या नहीं, क्योंकि कंपनियां ऐसी खामियां बाद के अपडेट में अक्सर ठीक करती हैं। अगर कोई खास ऐप ही समस्या की जड़ दिख रहा है, तो उसे अनइंस्टॉल करके दोबारा इंस्टॉल कर लीजिए। इससे भी बात न बने, तो फोन का बैकअप लेकर फैक्टरी रीसेट करना आखिरी उपाय हो सकता है। लेकिन रीसेट से पहले अपना जरूरी डेटा जरूर सुरक्षित कर लें।
गर्मी, चार्जिंग की आदतें और केस
गर्मी बैटरी की दुश्मन है। फोन को तकिए के नीचे, कंबल के भीतर या धूप वाली जगह पर रखकर सोने से वह जल्दी गर्म होता है। गर्म फोन में बैटरी ज्यादा तेजी से खर्च होती है और लंबे समय में उसकी सेहत भी बिगड़ती है। मोटा केस पहना हो तो गर्मी बाहर निकलने में और दिक्कत होती है।
रात भर चार्जिंग पर रखने की आदत पर भी लोग अक्सर चिंतित रहते हैं। आधुनिक फोन में बैटरी पूरी भर जाने पर चार्जिंग अपने आप रुक जाती है। कई फोन में “ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग” या “अडैप्टिव चार्जिंग” जैसी सुविधा भी होती है, जो रात में बैटरी को एक सीमा तक चार्ज करके सुबह जागने के समय के आसपास पूरा चार्ज करती है। इससे बैटरी पर तनाव कम होता है। अगर आपके फोन में यह विकल्प है, तो उसे चालू रखिए। असली और सही क्षमता वाले चार्जर का इस्तेमाल करना भी जरूरी है, क्योंकि सस्ते और नकली चार्जर बैटरी और फोन दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कैसे पता करें कि कौन सा ऐप बैटरी खा रहा है
कारण कुछ भी हो, सबसे काम की बात यह जानना है कि बैटरी किसने खर्च की। दोनों तरह के फोन में इसका तरीका है।
एंड्रॉइड फोन में सेटिंग्स खोलकर बैटरी वाले हिस्से में जाइए। वहां “बैटरी इस्तेमाल” या इससे मिलते-जुलते नाम से ऐप-वार आंकड़े दिखते हैं। आप पिछले चौबीस घंटे का समय चुनकर देख सकते हैं कि रात के समय कौन सा ऐप सबसे ऊपर है। मेन्यू और नाम ब्रांड के हिसाब से थोड़े अलग हो सकते हैं।
आईफोन में सेटिंग्स के भीतर बैटरी में जाइए। वहां पिछले 24 घंटे या 10 दिन के हिसाब से ऐप-वार इस्तेमाल दिखता है। साथ में यह भी दिखता है कि ऐप स्क्रीन पर सक्रिय था या बैकग्राउंड में।
अगर स्क्रीन बंद होने के बाद भी किसी ऐप का इस्तेमाल बहुत ज्यादा दिख रहा है, तो वही असली संदिग्ध है। उसकी बैकग्राउंड गतिविधि, लोकेशन अनुमति और नोटिफिकेशन सीमित कीजिए। कोई ऐप बहुत जरूरी न हो और फिर भी बैटरी खा रहा हो, तो उसे हटाकर उसका हल्का विकल्प इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।
रात में बैटरी बचाने के आसान उपाय
सोने से पहले कुछ छोटी आदतें असर दिखा सकती हैं। सबसे पहले उन ऐप्स की बैकग्राउंड गतिविधि बंद कीजिए जिनकी रात में कोई जरूरत नहीं। फिर लोकेशन अनुमति की जांच कीजिए और “हमेशा” वाली अनुमतियां घटाइए। ब्लूटूथ बंद कर दीजिए और डू नॉट डिस्टर्ब या स्लीप मोड चालू कर लीजिए, ताकि अनावश्यक नोटिफिकेशन स्क्रीन न जलाएं।
अगर आपके फोन में बैटरी सेवर या लो-पावर मोड है, तो उसे रात के लिए शेड्यूल किया जा सकता है। यह मोड बैकग्राउंड गतिविधि और कुछ सुविधाओं को सीमित कर देता है। स्क्रीन की चमक भी कम रखिए और ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले की जरूरत न हो तो उसे बंद कर दीजिए। फोन को सपाट सतह पर रखिए, तकिए या कंबल के नीचे नहीं।
इन उपायों के बाद भी दो-तीन रात तक बैटरी इसी रफ्तार से घटे, तो अधिकृत सर्विस सेंटर में जांच कराना सही रहेगा। वहां बैटरी की सेहत, चार्जिंग पोर्ट और सॉफ्टवेयर की हालत परख ली जाती है। अगर फोन वारंटी में है, तो बैटरी की शिकायत पर कंपनी की शर्तों के अनुसार मुफ्त जांच या बदलाव मिल सकता है। इसके लिए बिल और वारंटी की शर्तें पहले देख लीजिए। फोन फूला हुआ दिखे, बहुत गर्म हो जाए या बैटरी से अजीब गंध आए, तो उसे तुरंत इस्तेमाल करना बंद कर दीजिए और बिना देर किए सर्विस सेंटर ले जाइए, क्योंकि यह सुरक्षा का मामला हो सकता है।
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