How to Reduce Screen Time : मोबाइल का Screen Time कम करने के 10 आसान तरीके

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How to Reduce Screen Time : सुबह आँख खुलते ही सबसे पहले हाथ फ़ोन की तरफ़ जाता है। “बस 5 मिनट देख लेती हूँ” कहकर उठाया था, और जब नज़र उठी तो एक घंटा गुज़र चुका था। अगर ये आपकी भी कहानी है, तो घबराइए मत, आप अकेले नहीं हैं। आजकल लगभग हर कोई इस मोबाइल की लत से जूझ रहा है।

तो सवाल ये है कि how to reduce screen time? अच्छी बात ये है कि ये उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है। इसके लिए फ़ोन फेंकने या सारे apps डिलीट करने की ज़रूरत नहीं है। बस कुछ छोटी-छोटी आदतें बदलनी होती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 10 आसान तरीके।

Screen Time ज़्यादा होने से क्या नुकसान होते हैं?

तरीकों पर जाने से पहले एक बार समझ लेते हैं कि इसे कम करना क्यों ज़रूरी है:

  • आँखों में जलन, सूखापन और सिरदर्द
  • नींद की क्वालिटी खराब होना
  • गर्दन और कंधों में दर्द
  • हर वक़्त थकान और चिड़चिड़ापन
  • परिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम कम होना
  • काम और पढ़ाई में फ़ोकस की कमी

अगर इनमें से कुछ भी आपको अपने साथ होता दिखे, तो अब वक़्त है कुछ बदलने का।

1. पहले पता तो करो, कितना चल रहा है

जब तक आपको अपनी असली आदत का पता नहीं चलेगा, तब तक उसे सुधारेंगे कैसे? अपने फ़ोन की सेटिंग्स में जाकर Screen Time (iPhone) या Digital Wellbeing (Android) खोलिए। वहाँ दिख जाएगा कि दिन भर में कितना टाइम और किस app पर गया।

पहली बार देखकर शायद झटका लगे। 5-6 घंटे का आँकड़ा देखकर कई लोग हैरान रह जाते हैं। लेकिन यही झटका बदलाव की शुरुआत बनता है।

2. फ़ालतू Notifications बंद कर दो

हर “ting” पर फ़ोन उठाने की आदत सबसे बड़ा जाल है। एक notification देखने गए और फिर 20 मिनट Instagram पर घूमते रहे।

अपने फ़ोन में जाकर सिर्फ़ ज़रूरी apps के notifications रखिए, जैसे कॉल, मैसेज और बैंकिंग। बाकी सब, यानी shopping apps, गेम्स और सोशल मीडिया के अलर्ट, बंद कर दीजिए। यक़ीन मानिए, दुनिया नहीं रुकेगी।

3. App Limit लगा दो

Screen time limit set करना इस पूरे सफ़र का सबसे काम का स्टेप है। फ़ोन में ही ये सुविधा मिलती है कि आप किसी भी app के लिए रोज़ का टाइम तय कर सकते हैं।

मान लीजिए Instagram के लिए आपने 45 मिनट रखे। टाइम पूरा होते ही फ़ोन खुद बता देगा कि लिमिट ख़त्म हो गई। शुरू में थोड़ा अजीब लगेगा, पर धीरे-धीरे आदत बन जाएगी। एक साथ बहुत कम लिमिट मत रखिए, पहले थोड़ा-थोड़ा घटाइए।

4. सोने से पहले और उठते ही फ़ोन से दूरी

ये तरीका सुनने में छोटा है, पर असर बहुत बड़ा करता है। सोने से कम से कम 30 मिनट पहले फ़ोन रख दीजिए और उसे बिस्तर से दूर चार्जिंग पर लगाइए। सुबह उठते ही भी पहले 15-20 मिनट फ़ोन मत देखिए। पानी पीजिए, थोड़ा stretch कीजिए या खिड़की के पास खड़े होकर चाय का मज़ा लीजिए।

इससे नींद भी अच्छी आती है और दिन की शुरुआत शांत रहती है।

5. Home Screen साफ़ रखो और फ़ालतू Apps हटाओ

जिन apps पर आप सबसे ज़्यादा टाइम बर्बाद करते हैं, उन्हें home screen से हटाकर किसी folder के अंदर छुपा दीजिए। जब apps ढूँढने में थोड़ी मेहनत लगेगी, तो आप बिना सोचे उन्हें खोलना कम कर देंगे।

साथ ही फ़ोन में पड़े उन apps को डिलीट कर दीजिए जो आपने महीनों से इस्तेमाल नहीं किए। फ़ोन भी हल्का होगा और दिमाग भी।

6. फ़ोन को Black & White कर दो

ये ट्रिक थोड़ी अजीब लगेगी, लेकिन कमाल की है। फ़ोन की सेटिंग्स में Grayscale mode ऑन कर दीजिए। जब सब कुछ ब्लैक एंड व्हाइट दिखेगा, तो रंग-बिरंगे फ़ीड का आकर्षण अपने आप कम हो जाता है। कई लोगों ने इससे अपना screen time सच में घटाया है, आप भी आज़मा कर देखिए।

7. खाना खाते वक़्त और बात करते वक़्त Phone-Free रहो

खाना खाते हुए रील्स देखना आज की सबसे आम आदत बन गई है। कोशिश कीजिए कि खाने के समय फ़ोन दूसरे कमरे में या कम से कम आँखों से दूर रहे।

इसी तरह जब घर में कोई बात कर रहा हो, तो फ़ोन नीचे रख दीजिए। इससे रिश्ते भी मज़बूत होते हैं और आपको खाने का स्वाद भी पता चलता है। एक छोटा-सा नियम बना लीजिए: खाने की टेबल पर फ़ोन नहीं।

8. नया Hobby पकड़ो

अक्सर हम फ़ोन इसलिए उठाते हैं क्योंकि हमारे पास करने को कुछ और होता ही नहीं, यानी बोरियत। इसका सबसे अच्छा इलाज है कोई ऐसा शौक जिसमें आपको मज़ा आए।

  • किताब पढ़ना
  • ड्रॉइंग या पेंटिंग
  • बागवानी (गार्डनिंग)
  • कुकिंग में नए experiments
  • सुबह या शाम की वॉक
  • डायरी लिखना

जब हाथ और दिमाग दोनों किसी काम में लगे होंगे, तो फ़ोन की याद कम आएगी।

9. अलार्म और घड़ी के लिए अलग इंतज़ाम करो

बहुत से लोग कहते हैं, “फ़ोन तो अलार्म के लिए पास रखना पड़ता है।” और फिर अलार्म बंद करने के बहाने फ़ोन खोलते ही notifications में उलझ जाते हैं।

एक सस्ती-सी अलार्म घड़ी ले आइए और टाइम देखने के लिए एक रिस्ट वॉच पहन लीजिए। इससे फ़ोन आपके बिस्तर से बाहर रहेगा और “टाइम देखने” के बहाने उठाने की आदत भी कम होगी।

10. हफ़्ते में एक बार Digital Detox ट्राई करो

पूरे हफ़्ते में कोई एक दिन, या कम से कम कुछ घंटे, ऐसे चुनिए जब आप सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहें। संडे की सुबह इसके लिए अच्छा समय हो सकता है। परिवार के साथ बाहर घूमने जाइए, पुराने दोस्त से मिलिए या बस घर पर आराम कीजिए।

शुरुआत में थोड़ी बेचैनी हो सकती है, पर थोड़े समय बाद आपको ख़ुद फ़र्क महसूस होगा। ये digital detox आपके दिमाग को रीसेट करने जैसा काम करता है।

शुरुआत कैसे करें?

सब कुछ एक साथ बदलने की कोशिश मत कीजिए, वरना दो दिन में हिम्मत जवाब दे जाएगी। ऊपर बताए तरीकों में से बस 2-3 चुनिए और एक हफ़्ते तक उन्हें अपनाइए। जब वो आदत बन जाएं, तब अगले तरीके जोड़ते जाइए।

और अगर कभी फिसल भी जाएं, तो ख़ुद को कोसिए मत। अगले दिन फिर से कोशिश कीजिए। मोबाइल की लत छोड़ना एक दिन का काम नहीं है, ये धीरे-धीरे बनने वाली अच्छी आदत है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

एक दिन में कितना Screen Time ठीक माना जाता है?

कोई एक fixed नंबर नहीं है, ये आपके काम पर निर्भर करता है। लेकिन अगर काम या पढ़ाई के अलावा आपका मनोरंजन वाला screen time रोज़ 2-3 घंटे से ज़्यादा है, तो उसे कम करने पर ज़रूर सोचना चाहिए।

क्या बच्चों का Screen Time भी इन्हीं तरीकों से कम हो सकता है?

हाँ, काफ़ी हद तक। बच्चों के लिए app limit, खाने के समय phone-free नियम और बाहर खेलने की आदत बहुत काम आती है। सबसे ज़रूरी बात ये है कि बड़े ख़ुद भी वही नियम मानें, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं।

क्या Screen Time कम करने में कोई app मदद करता है?

हाँ, फ़ोन की अपनी Digital Wellbeing और Screen Time सेटिंग्स ही शुरुआत के लिए काफ़ी हैं। चाहें तो Play Store या App Store से focus और app-blocker वाले apps भी ट्राई कर सकते हैं।

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Laxmi Nautiyal

लक्ष्मी नौटियाल पिछले 5 सालों से कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें न्यूज, राजनीति, शिक्षा, मनोरंजन, खेल, बिजनेस और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वह इससे पहले कई वेबसाइट्स के लिए काम कर चुकी हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना है। वह हर विषय पर रिसर्च करके ऐसा कंटेंट लिखने की कोशिश करती हैं, जिसे पाठक आसानी से समझ सकें और जिससे उन्हें जरूरी जानकारी मिल सके।

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