National Symbols of India: भारत के सभी राष्ट्रीय प्रतीक, उनका महत्व और रोचक तथ्यभारत का राष्ट्रीय पशु शेर है या बाघ? क्या कमल सचमुच राष्ट्रीय फूल है? राष्ट्रीय खेल हॉकी है या नहीं? परीक्षा से लेकर आम बातचीत तक ये सवाल बार-बार उठते हैं, और कई लोग इनके गलत जवाब देते हैं। इस लेख में भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों की पूरी सूची है। हर प्रतीक का महत्व, उसे अपनाए जाने की तारीख और उन बातों का सच भी बताया गया है जिन पर लोगों में भ्रम रहता है।
राष्ट्रीय प्रतीक क्या होते हैं
राष्ट्रीय प्रतीक वे चीजें हैं जो किसी देश की पहचान बताती हैं। भारत के प्रतीक दो तरह के हैं। एक वे जो देश की राजनीतिक और ऐतिहासिक यात्रा से जुड़े हैं, जैसे ध्वज, चिन्ह, गान और गीत। दूसरे वे जो यहां की प्रकृति और संस्कृति को दिखाते हैं, जैसे बाघ, मोर, बरगद और गंगा।
एक बात पहले ही साफ कर देनी चाहिए। प्रतीकों की कोई एक तय संख्या नहीं है। अलग-अलग किताबों और वेबसाइटों में 16, 17 या इससे ज्यादा प्रतीक गिनाए जाते हैं, क्योंकि सरकार ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग फैसलों से इन्हें घोषित किया है। कुछ चीजों को लोग राष्ट्रीय प्रतीक मान लेते हैं, जबकि उनकी आधिकारिक घोषणा हुई ही नहीं है। इसके बारे में आगे अलग से बताया गया है।
एक नजर में: भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों की सूची
| प्रतीक | नाम | अपनाने की तारीख |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय ध्वज | तिरंगा | 22 जुलाई 1947 |
| राष्ट्रीय चिन्ह | सारनाथ का सिंह स्तंभ | 26 जनवरी 1950 |
| राष्ट्रीय गान | जन गण मन | 24 जनवरी 1950 |
| राष्ट्रीय गीत | वंदे मातरम् | 24 जनवरी 1950 |
| राष्ट्रीय पंचांग | शक संवत | 22 मार्च 1957 |
| रुपये का चिह्न | ₹ | 15 जुलाई 2010 |
| राष्ट्रीय पशु | बंगाल टाइगर | अप्रैल 1973 |
| राष्ट्रीय पक्षी | भारतीय मोर | फरवरी 1963 |
| राष्ट्रीय जलीय जीव | गंगा नदी डॉल्फिन | 5 अक्टूबर 2009 (फैसला), 10 मई 2010 (अधिसूचना) |
| राष्ट्रीय धरोहर पशु | भारतीय हाथी | 22 अक्टूबर 2010 |
| राष्ट्रीय वृक्ष | बरगद | आधिकारिक तारीख उपलब्ध नहीं |
| राष्ट्रीय फल | आम | आधिकारिक तारीख उपलब्ध नहीं |
| राष्ट्रीय नदी | गंगा | नवंबर 2008 |
| राष्ट्रीय सूक्ष्मजीव | लैक्टोबैसिलस डेलब्रुएकी | 18 अक्टूबर 2012 |
जहां तारीख की जगह “आधिकारिक तारीख उपलब्ध नहीं” लिखा है, वहां सरकारी रिकॉर्ड में सटीक तारीख सार्वजनिक रूप से नहीं मिलती। कुछ वेबसाइटें इनके आगे बिना किसी सरकारी हवाले के साल लिख देती हैं, पर उसे पुख्ता नहीं माना जा सकता।
राष्ट्रीय ध्वज: तिरंगा

भारत का झंडा आयताकार है और उसमें तीन बराबर पट्टियां हैं। ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग है। सफेद पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग का चक्र है, जिसमें 24 तीलियां हैं। झंडे की चौड़ाई और लंबाई का अनुपात 2:3 है।
आम तौर पर केसरिया रंग को साहस और बलिदान का, सफेद को शांति और सच्चाई का और हरे को उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन रंगों के अर्थ बताने वाली व्याख्याओं में थोड़ा फर्क मिलता है, पर भाव मोटे तौर पर यही है। बीच का चक्र धर्मचक्र है, जो सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है।
तिरंगे का डिजाइन पिंगली वेंकैया के प्रस्तावित स्वराज ध्वज पर आधारित था। संविधान सभा ने इसे 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया, और 15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने इसे फहराया। झंडे के इस्तेमाल और सम्मान के नियम भारतीय ध्वज संहिता में दिए गए हैं।
राष्ट्रीय चिन्ह और सत्यमेव जयते
भारत सरकार के हर आधिकारिक दस्तावेज, मुहर और सिक्के पर जो चिन्ह दिखता है, वह सारनाथ में मिले अशोक के सिंह स्तंभ का रूप है। असली स्तंभ में चार सिंह पीठ से पीठ सटाकर खड़े हैं। तस्वीर में एक साथ तीन ही दिखते हैं, चौथा पीछे छिपा रहता है। सिंहों के नीचे गोल आधार है, जिस पर हाथी, दौड़ता घोड़ा, बैल और सिंह की आकृतियां बनी हैं, और इनके बीच-बीच में धर्मचक्र है। सबसे नीचे उल्टे कमल का आकार है।
आधार के नीचे देवनागरी में सत्यमेव जयते लिखा होता है, जिसका अर्थ है “सत्य की ही जीत होती है।” यह वाक्य मुंडक उपनिषद से लिया गया है। चिन्ह को 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया, और इसके मौजूदा रूप को बनाने का श्रेय दीनानाथ भार्गव को दिया जाता है।
इस चिन्ह के गलत इस्तेमाल पर रोक के लिए 2005 में राज्य चिन्ह (अनुचित प्रयोग प्रतिषेध) अधिनियम बना है। इसलिए कोई व्यक्ति या संस्था इसे अपने निजी लोगो या विज्ञापन में नहीं लगा सकती।
राष्ट्रीय गान: जन गण मन
“जन गण मन” को रवींद्रनाथ टैगोर ने मूल रूप से बांग्ला में लिखा था। यह उनके गीत “भारतो भाग्य विधाता” का पहला अंश है। स्रोतों के अनुसार इसकी रचना 11 दिसंबर 1911 को हुई और 27 दिसंबर 1911 को कलकत्ता में कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार गाया गया।
संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसके पहले अंश को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। पूरे गान को गाने या बजाने में लगभग 52 सेकंड लगते हैं। गृह मंत्रालय के आदेशों में इसका एक संक्षिप्त रूप भी तय है, जिसमें पहली और आखिरी पंक्ति होती है और जो लगभग 20 सेकंड का होता है। संक्षिप्त रूप कुछ खास मौकों पर ही बजाया जाता है, जैसे सेना की मेस में जाम उठाते समय।
राष्ट्रीय गीत: वंदे मातरम्
वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह 1882 में प्रकाशित उनके बांग्ला उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन में यह गीत प्रेरणा और नारे की तरह इस्तेमाल हुआ। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे कांग्रेस के मंच पर गाया, जिसके बाद इसे राजनीतिक पहचान मिली।
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसके पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई 2026 को सभी राज्यों और मंत्रालयों को समेकित आदेश भेजे हैं। इनमें इस गीत का आधिकारिक रूप करीब 3 मिनट 10 सेकंड का बताया गया है, और कई रिपोर्टों के अनुसार इसमें सभी छह अंतरे शामिल हैं। आदेशों में एक नियम और साफ किया गया है। राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत साथ गाए या बजाए जाएं तो पहले वंदे मातरम् होगा और उसके बाद जन गण मन।
राष्ट्रीय पंचांग और रुपये का चिह्न
भारत का राष्ट्रीय पंचांग शक संवत पर आधारित है। इसे 22 मार्च 1957 को अपनाया गया। इसमें 365 दिन और 12 महीने होते हैं और चैत्र पहला महीना होता है। इसका इस्तेमाल भारत के राजपत्र, आकाशवाणी के समाचारों और सरकारी कैलेंडरों में ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ किया जाता है।
रुपये का चिह्न ₹ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2010 को मंजूर किया। यह देवनागरी के “र” और रोमन अक्षर “R” का मेल है, जिसके ऊपर दो समानांतर रेखाएं हैं। माना जाता है कि ये रेखाएं तिरंगे और समानता को दर्शाती हैं। इसे खुली प्रतियोगिता के जरिए चुना गया था और इसके डिजाइनर डी. उदय कुमार हैं। “रुपया” शब्द संस्कृत के “रूप्य” से निकला है, जो प्राचीन समय में सिक्कों के लिए इस्तेमाल होता था।
राष्ट्रीय पशु: बंगाल टाइगर
बाघ को राष्ट्रीय पशु का दर्जा अप्रैल 1973 में मिला। इससे पहले शेर को यह दर्जा हासिल था। 1972 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में बाघ को चुना गया, क्योंकि बाघ देश के बड़े हिस्से में पाया जाता है, जबकि एशियाई शेर सिर्फ गुजरात के गिर क्षेत्र तक सीमित है। इसी वजह से अब भी कई लोग शेर को राष्ट्रीय पशु समझ बैठते हैं।
पीली खाल पर काली धारियों वाला बाघ ताकत, फुर्ती और गरिमा का प्रतीक माना जाता है। 2022 की बाघ गणना रिपोर्ट के आधार पर 2023 तक यह कहा गया कि दुनिया के जंगली बाघों का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा भारत में है। बाघ को बचाने के लिए 1973 में ही प्रोजेक्ट टाइगर शुरू हुआ था, यानी बाघ के राष्ट्रीय पशु बनने और इस परियोजना की शुरुआत का समय एक ही है।
राष्ट्रीय पक्षी: भारतीय मोर
मोर को फरवरी 1963 में राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। नर मोर की गर्दन नीली होती है और उसकी लंबी पूंछ पर आंखों जैसे रंगीन निशान बने होते हैं। प्रजनन के मौसम में वह इन पंखों को पंखे की तरह फैलाकर नाचता है। यह पक्षी भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी है।
कला, लोककथाओं और धार्मिक कथाओं में मोर का जिक्र बहुत पुराना है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत यह संरक्षित पक्षी है, इसलिए इसका शिकार या इसे पालना कानूनन अपराध है।
राष्ट्रीय जलीय जीव और राष्ट्रीय धरोहर पशु
गंगा नदी डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा लुप्त होने के खतरे की ओर ध्यान दिलाने के लिए दिया गया। 5 अक्टूबर 2009 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की पहली बैठक में यह फैसला लिया गया। 10 मई 2010 को इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी हुई। यह मीठे पानी की डॉल्फिन है, जो गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में पाई जाती है, और हिंदी में इसे आम तौर पर “सूंस” कहा जाता है।
यह संकटग्रस्त प्रजाति है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल है। इसे नदी के स्वास्थ्य का संकेतक माना जाता है, यानी जिस नदी में डॉल्फिन मौजूद हो, उसका पारिस्थितिक तंत्र बेहतर माना जाता है। 5 अक्टूबर को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
भारतीय हाथी को 22 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया गया। यह भारत का सबसे बड़ा स्थलीय स्तनधारी है। एशियाई हाथियों की तीन चौथाई के करीब आबादी भारत में है। यहां की पौराणिक कथाओं, मंदिरों और परंपराओं में हाथी का जिक्र जगह-जगह मिलता है।
राष्ट्रीय वृक्ष, फल और नदी
बरगद भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है। इसकी शाखाओं से लटकती जड़ें नीचे आकर जमीन में धंस जाती हैं और समय के साथ नए तने बन जाती हैं। इसी वजह से एक पेड़ फैलकर बहुत बड़े क्षेत्र में छा सकता है। लंबी उम्र के कारण इसे अमर माना जाता है। इसकी गहरी जड़ें एकता का और इसकी छाया में रहने वाले अनगिनत जीव अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों के साथ रहने का प्रतीक माने जाते हैं।
आम राष्ट्रीय फल है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत पूर्वोत्तर भारत में हुई। भारत में इसकी खेती प्राचीन समय से हो रही है और इसकी सैकड़ों किस्में हैं। दुनिया में आम का सबसे बड़ा उत्पादक भारत ही है।
गंगा को नवंबर 2008 में राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया। यह पश्चिमी हिमालय से निकलकर उत्तर भारत के मैदानों से बहती है। पाटलिपुत्र, वाराणसी और प्रयागराज जैसे ऐतिहासिक शहर इसी के किनारे बसे हैं। हिंदू धर्म में इसे देवी के रूप में पूजा जाता है, और करोड़ों लोगों की खेती, पीने के पानी और आजीविका इस पर टिकी है।
राष्ट्रीय सूक्ष्मजीव: लैक्टोबैसिलस
यह सूची का सबसे नया प्रतीक है, जिसे 18 अक्टूबर 2012 को चुना गया। यह एक जीवाणु है, जिसका इस्तेमाल दही जैसे किण्वित खाद्य पदार्थ बनाने में होता है, और इसे प्रोबायोटिक भी माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे चुनने की प्रक्रिया में बच्चों की वोटिंग शामिल थी। यह प्रतीक इसलिए रोचक है कि यह दिखाता है कि राष्ट्रीय प्रतीक सिर्फ बड़े और भव्य जीव-जंतुओं तक सीमित नहीं हैं।
जिन्हें लोग राष्ट्रीय प्रतीक मान लेते हैं
कुछ चीजें इतनी प्रचलित हैं कि लोग उन्हें आधिकारिक प्रतीक मान लेते हैं।
कमल: कई सरकारी और शैक्षिक सामग्रियों में कमल को राष्ट्रीय पुष्प लिखा मिलता है। लेकिन 2019 में राज्यसभा में सरकार की ओर से बताया गया कि भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रीय पुष्प घोषित नहीं है। कमल भारत की कला और संस्कृति का बहुत पुराना शुभ प्रतीक जरूर है।
हॉकी: 2012 में खेल मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में कहा कि भारत का कोई राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं है। फिर भी हॉकी को राष्ट्रीय खेल कहा जाता रहा है, क्योंकि भारत ने ओलंपिक में हॉकी के आठ स्वर्ण पदक जीते हैं, जो किसी भी देश के लिए सबसे ज्यादा है।
राष्ट्रपिता: महात्मा गांधी को देश में राष्ट्रपिता कहकर सम्मान दिया जाता है। लेकिन आरटीआई के जवाबों में सरकार ने कहा कि यह उपाधि औपचारिक रूप से कभी दी नहीं गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की है कि गांधी जी जनता के दिलों में राष्ट्रपिता हैं और इसके लिए औपचारिक मान्यता की जरूरत नहीं।
राष्ट्रीय सरीसृप के तौर पर किंग कोबरा का नाम भी कुछ जगह मिलता है, पर इसकी आधिकारिक पुष्टि मुझे किसी भरोसेमंद स्रोत में नहीं मिली, इसलिए इसे सूची में नहीं रखा गया।
प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियम
तिरंगे, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय चिन्ह के इस्तेमाल के लिए कानून और नियम बने हैं। झंडे को जमीन से छूने देना, उसे फटी या गंदी हालत में फहराना या उसका अपमान करना कानूनन गलत है। इसके लिए भारतीय ध्वज संहिता और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 जैसे प्रावधान हैं।
राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत गाए या बजाए जाने के समय श्रोताओं को सावधान की मुद्रा में खड़े रहना होता है। सिर्फ तब छूट है जब ये किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा हों। दोनों साथ बजें तो पहले वंदे मातरम् आता है। राष्ट्रीय चिन्ह का निजी या व्यावसायिक इस्तेमाल रोकने के लिए ऊपर बताया गया 2005 का कानून है। नियमों की बारीकियां समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए किसी खास मामले में गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर ताजा आदेश देख लेना ठीक रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
भारत में कितने राष्ट्रीय प्रतीक हैं?
भारत का राष्ट्रीय पशु कौन सा है?
राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत में क्या फर्क है?
राष्ट्रीय जलीय जीव कौन सा है और कब घोषित हुआ?
सबसे नया राष्ट्रीय प्रतीक कौन सा है?
इन प्रतीकों को जानना क्यों काम का है
राष्ट्रीय प्रतीक सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं के सवाल नहीं हैं। तिरंगे के रंग, चिन्ह के जानवर, बाघ और डॉल्फिन जैसे जीवों का दर्जा और गंगा या बरगद की जगह, ये सब बताते हैं कि देश ने अपनी पहचान किन चीजों में देखी। इनमें से कई, जैसे बाघ, डॉल्फिन और हाथी, ऐसे जीव हैं जिन्हें बचाए रखने की जरूरत है। जब कोई प्रजाति राष्ट्रीय प्रतीक बनती है, तो उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी सबके हिस्से आती है।
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