Offside Rule in Football: ऑफसाइड रूल क्या है? आसान उदाहरण और आम गलतफहमियांमैच चल रहा है, स्ट्राइकर गेंद लेकर गोलकीपर को चकमा देता है और गोल कर देता है। पूरा स्टेडियम झूम उठता है। तभी साइड लाइन पर असिस्टेंट रेफरी का झंडा ऊपर उठता है और गोल रद्द हो जाता है।
ऐसे में लगभग हर किसी के मन में एक ही सवाल आता है कि आख़िर ये ऑफसाइड हुआ कैसे? Football में Offside Rule को खेल का सबसे उलझा हुआ नियम माना जाता है। कई लोग सालों से मैच देखते हैं, फिर भी इस पर बहस करते मिल जाते हैं।
सच यह है कि यह नियम उतना मुश्किल नहीं, जितना लगता है। बस इसे सही क्रम में समझना ज़रूरी है। इस आर्टिकल में हम ऑफसाइड रूल को आसान भाषा में, उदाहरणों के साथ समझेंगे और उन गलतफहमियों पर भी बात करेंगे जो इसके बारे में सबसे ज़्यादा फैली हैं।
ऑफसाइड रूल क्या है
सीधे शब्दों में, ऑफसाइड रूल हमलावर खिलाड़ी को विरोधी गोल के पास छिपकर इंतज़ार करने से रोकता है।
सोचिए अगर यह नियम न होता। एक स्ट्राइकर पूरे मैच में विरोधी गोल के पास खड़ा रहता और बाकी टीम बस लंबी गेंदें उसकी तरफ़ फेंकती रहती। न पासिंग का मज़ा बचता, न टीमवर्क का। इसी “गोल के पास टिककर बैठने” वाली चालाकी को रोकने के लिए यह नियम बनाया गया।
फुटबॉल के आधिकारिक कानूनों में यह Law 11 के तहत आता है। इन कानूनों को IFAB नाम की संस्था तय करती है।
ऑफसाइड पोज़िशन कब बनती है
एक खिलाड़ी ऑफसाइड पोज़िशन में तभी माना जाता है, जब दोनों बातें साथ-साथ सच हों:
- वह विरोधी टीम के हाफ़ में हो
- उसके सिर, शरीर या पैर का कोई हिस्सा गेंद और विरोधी के दूसरे आख़िरी खिलाड़ी, दोनों से ज़्यादा विरोधी गोल लाइन के पास हो
“दूसरे आख़िरी खिलाड़ी” वाली बात पर ध्यान दीजिए। ज़्यादातर लोग समझते हैं कि हमलावर गोलकीपर से आगे नहीं होना चाहिए। असल में गोलकीपर समेत विरोधी के आख़िरी दो खिलाड़ियों को देखा जाता है।
आम तौर पर गोलकीपर सबसे पीछे होता है, तो दूसरा आख़िरी खिलाड़ी वह डिफेंडर होता है जो उसके बाद सबसे पीछे खड़ा है। हमलावर अगर इस डिफेंडर से आगे है, तो वह ऑफसाइड पोज़िशन में है।
एक आसान उदाहरण
टीम A हमला कर रही है और टीम B डिफेंड कर रही है। इसे स्टेप-बाय-स्टेप देखते हैं:
- टीम B का गोलकीपर गोल लाइन पर खड़ा है
- उसके आगे सबसे पीछे वाला डिफेंडर पेनल्टी बॉक्स के किनारे पर है
- टीम A का स्ट्राइकर इस डिफेंडर से दो कदम आगे खड़ा है
- मिडफ़ील्ड से उसका साथी गेंद आगे बढ़ाता है
जिस पल साथी ने गेंद खेली, उस पल स्ट्राइकर डिफेंडर से आगे था। इसलिए वह ऑफसाइड पोज़िशन में है। अब अगर वह गेंद को छूता है, तो रेफरी ऑफसाइड देगा।
लेकिन अगर वही स्ट्राइकर डिफेंडर के बराबर या उससे पीछे खड़ा होता, तो चाहे वह बाद में कितना भी तेज़ दौड़ता, उसे ऑफसाइड नहीं दिया जा सकता था।
फ़ैसला पास के पल पर होता है
यह इस नियम की सबसे ज़रूरी बात है, और यहीं सबसे ज़्यादा गड़बड़ होती है।
खिलाड़ी की पोज़िशन उस पल देखी जाती है जब उसका साथी गेंद को खेलता है, उस पल नहीं जब वह खुद गेंद पकड़ता है।
इसीलिए तेज़ स्ट्राइकर डिफेंडर की लाइन पर खड़े रहते हैं और जैसे ही पास निकलता है, दौड़ पड़ते हैं। पास के पल में वे ऑनसाइड होते हैं, इसलिए बाद में आगे निकलना जायज़ है।
ऑफसाइड पोज़िशन और ऑफसाइड फ़ाउल अलग हैं
कानून साफ़ कहता है कि सिर्फ़ ऑफसाइड पोज़िशन में खड़े होना कोई गलती नहीं है। गलती तब बनती है, जब उस पोज़िशन में खड़ा खिलाड़ी खेल में सक्रिय रूप से शामिल हो जाए।
इसके तीन तरीके हैं:
- गेंद को खेलना या छूना: साथी का पास खेलना या छूना
- विरोधी के खेल में दख़ल देना: जैसे गोलकीपर की नज़र रोकना, गेंद के लिए डिफेंडर से भिड़ना, या गेंद खेलने की ऐसी कोशिश करना जिससे विरोधी की प्रतिक्रिया पर असर पड़े
- फ़ायदा उठाना: गेंद गोलपोस्ट, क्रॉसबार या किसी मैच ऑफ़िशियल से टकराकर लौटे, या विरोधी उसे जानबूझकर बचाए, और उसके बाद ऑफसाइड पोज़िशन का खिलाड़ी उसे खेल ले
इसीलिए कई बार कोई खिलाड़ी साफ़ ऑफसाइड पोज़िशन में दिखता है, फिर भी झंडा नहीं उठता। उसने न गेंद छुई, न किसी के खेल में दख़ल दिया।
कब ऑफसाइड नहीं लगता
कुछ हालात में ऑफसाइड रूल लागू ही नहीं होता। अगर खिलाड़ी को गेंद सीधे इनसे मिलती है, तो उसे ऑफसाइड नहीं दिया जा सकता:
- गोल किक
- थ्रो-इन
- कॉर्नर किक
इसीलिए कॉर्नर पर आपको स्ट्राइकर गोलकीपर के बिल्कुल पास खड़े दिखते हैं।
इसके अलावा, अपने ही हाफ़ में खड़ा खिलाड़ी कभी ऑफसाइड नहीं हो सकता। और जो खिलाड़ी गेंद के बराबर या उससे पीछे है, वह भी ऑफसाइड नहीं माना जाता।
ऑफसाइड का फ़ैसला होने पर क्या होता है
ऑफसाइड का फ़ाउल मिलने पर विरोधी टीम को इनडायरेक्ट फ़्री किक मिलती है। यह उस जगह से ली जाती है, जहाँ ऑफसाइड करने वाला खिलाड़ी था।
इनडायरेक्ट का मतलब है कि सीधे गोल नहीं हो सकता। गेंद को गोल में जाने से पहले किसी दूसरे खिलाड़ी को छूना होगा।
एक बात और: ऑफसाइड के लिए कोई कार्ड नहीं दिखाया जाता। यह सिर्फ़ खेल रोककर फ़्री किक देने वाला फ़ैसला है।
आम गलतफहमियां
अब वो हिस्सा, जिसके लिए शायद आप यह आर्टिकल पढ़ रहे हैं।
गलतफहमी 1: गोलकीपर से आगे होना ऑफसाइड है। नहीं। देखा जाता है कि हमलावर विरोधी के आख़िरी दो खिलाड़ियों से आगे है या नहीं। गोलकीपर उनमें से एक है, अकेला पैमाना नहीं।
गलतफहमी 2: ऑफसाइड पोज़िशन में खड़े होना ही फ़ाउल है। नहीं। फ़ाउल तब बनता है, जब खिलाड़ी खेल में शामिल हो।
गलतफहमी 3: बराबर खड़े खिलाड़ी को भी ऑफसाइड मिलता है। यह पुराना नियम था। 1990 में कानून बदला और तब से डिफेंडर के बराबर (level) खड़ा हमलावर ऑनसाइड माना जाता है।
गलतफहमी 4: हाथ आगे निकला हो तो ऑफसाइड। नहीं। ऑफसाइड तय करते समय सिर, शरीर और पैर गिने जाते हैं। हाथ और बाँह की गिनती नहीं होती।
गलतफहमी 5: गेंद रिसीव करते समय की पोज़िशन देखी जाती है। नहीं। पोज़िशन उस पल देखी जाती है, जब साथी ने गेंद खेली।
गलतफहमी 6: विरोधी ने गेंद छू ली, तो ऑफसाइड ख़त्म। यह इस पर निर्भर है। अगर डिफेंडर ने जानबूझकर गेंद खेली, यानी उसके पास गेंद पर कंट्रोल करने का मौका था, तो ऑफसाइड रद्द हो जाता है। लेकिन अगर गेंद उससे सिर्फ़ टकराकर या उछलकर लौटी, तो ऑफसाइड बना रहता है। यही वजह है कि डिफ़्लेक्शन के बाद भी कभी-कभी ऑफसाइड दिया जाता है।
गलतफहमी 7: गेंद छुए बिना ऑफसाइड नहीं हो सकता। हो सकता है। अगर ऑफसाइड पोज़िशन का खिलाड़ी गोलकीपर की नज़र रोके या किसी डिफेंडर के खेल में दख़ल दे, तो गेंद छुए बिना भी ऑफसाइड दिया जा सकता है।
VAR और तकनीक ने ऑफसाइड को कैसे बदला
पहले ऑफसाइड का फ़ैसला पूरी तरह असिस्टेंट रेफरी की नज़र पर टिका था। तेज़ दौड़ते खिलाड़ियों की पोज़िशन और गेंद छूने का पल एक साथ पकड़ना इंसानी आँख के लिए बहुत मुश्किल है, इसलिए कई गलत फ़ैसले होते थे।
अब VAR यानी वीडियो असिस्टेंट रेफरी इन फ़ैसलों को दोबारा जाँचता है। 2022 के फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में सेमी-ऑटोमैटेड ऑफसाइड टेक्नोलॉजी भी इस्तेमाल हुई, जिसमें स्टेडियम के कैमरे और गेंद के अंदर लगा सेंसर मिलकर खिलाड़ियों के शरीर के कई हिस्से ट्रैक करते हैं।
इससे फ़ैसले ज़्यादा सटीक हुए हैं, पर बहस पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई। कुछ सेंटीमीटर के फ़र्क पर गोल रद्द होना फ़ैन्स को आज भी खटकता है।
ऑफसाइड ट्रैप क्या होता है
कई टीमें इस नियम को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं। इसे ऑफसाइड ट्रैप कहते हैं।
इसमें पूरी डिफेंस लाइन एक साथ आगे बढ़ती है, ताकि हमलावर पीछे छूट जाएँ और ऑफसाइड पोज़िशन में फँस जाएँ। इसके लिए डिफेंडरों में ज़बरदस्त तालमेल चाहिए। एक भी खिलाड़ी पीछे रह गया, तो हमलावर सीधे गोलकीपर के सामने पहुँच सकता है।
इतिहास में यह नियम खेल की शैली पर सीधा असर डालता रहा है। पहले हमलावर और गोल के बीच तीन विरोधी खिलाड़ी होना ज़रूरी था। 1925 में यह संख्या दो कर दी गई, और उसके बाद मैचों में गोल काफ़ी बढ़ गए।
ऑफसाइड रूल से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. ऑफसाइड रूल आसान शब्दों में क्या है?
2. क्या गोलकीपर से आगे होने पर ऑफसाइड मिलता है?
3. बराबर खड़े खिलाड़ी को क्या ऑफसाइड दिया जाता है?
4. क्या हाथ आगे निकलने पर ऑफसाइड होता है?
5. क्या अपने हाफ़ में खिलाड़ी ऑफसाइड हो सकता है?
6. क्या गोल किक, थ्रो-इन या कॉर्नर से मिली गेंद पर ऑफसाइड होता है?
7. ऑफसाइड होने पर क्या मिलता है?
8. क्या ऑफसाइड पोज़िशन में खड़े होना गलत है?
9. VAR ऑफसाइड कैसे चेक करता है?
10. क्या डिफ़्लेक्शन के बाद भी ऑफसाइड हो सकता है?
यह भी जानें : FIFA World Cup Winners List: सबसे ज्यादा बार विश्व कप जीतने वाली टीम कौन? जानिए पूरी सूची





















