Chhath Puja Vidhi: छठ पूजा की संपूर्ण विधि, नियम और सामग्री सूची (नहाय खाय से उषा अर्घ्य तक)

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Chhath Puja Vidhi: छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं है, ये आस्था, अनुशासन और शुद्धता का महापर्व है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से निकलकर आज ये दिल्ली, मुंबई और विदेशों तक पहुँच चुका है। इसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा होती है, और व्रती चार दिन तक कड़े नियमों का पालन करते हैं। अगर आप पहली बार छठ कर रहे हैं या घर में किसी की मदद करना चाहते हैं, तो इस लेख में छठ पूजा विधि, हर दिन के नियम और पूरी सामग्री लिस्ट आसान भाषा में मिल जाएगी।

छठ पूजा क्या है और क्यों मनाई जाती है?

छठ पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यानी दिवाली के लगभग छह दिन बाद। इसमें डूबते और उगते, दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है कि सूर्य देव ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के दाता हैं, और छठी मैया संतान की रक्षा करने वाली देवी हैं। इसलिए ज़्यादातर परिवार संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखते हैं।

इसके पीछे कई कथाएँ प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे रामायण काल से जोड़ते हैं, जब माता सीता ने सूर्य उपासना की थी। कुछ लोग महाभारत में द्रौपदी के व्रत का ज़िक्र करते हैं, तो कुछ राजा प्रियंवद और रानी मालिनी की कथा सुनाते हैं। अलग-अलग जगह कहानी थोड़ी अलग मिलती है, लेकिन भाव एक ही है: प्रकृति और सूर्य के प्रति आभार।

छठ पूजा कितने दिन की होती है?

छठ पूजा चार दिन चलती है।

  • पहला दिन: नहाय खाय
  • दूसरा दिन: खरना
  • तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को)
  • चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण (उगते सूर्य को)

तारीख हर साल बदलती है, इसलिए सही दिन और अर्घ्य का समय अपने शहर के पंचांग या लोकल सूर्यास्त-सूर्योदय के हिसाब से ज़रूर देख लें।

पहला दिन: नहाय खाय की विधि

छठ की शुरुआत नहाय खाय से होती है। इस दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान करते हैं। उसके बाद पूरे घर की अच्छे से सफाई होती है, क्योंकि छठ में साफ-सफाई सबसे ज़रूरी मानी जाती है।

नहाय खाय का भोजन:
इस दिन खाना बहुत सादा और सात्विक बनता है। आमतौर पर कद्दू (लौकी) की सब्ज़ी, चने की दाल और अरवा चावल का भात बनता है। नमक सेंधा नमक होता है। खाना मिट्टी या नए बर्तन में, कई जगह आम की लकड़ी पर बनाया जाता है। पहले व्रती भोजन करते हैं, फिर परिवार के बाकी लोग प्रसाद के रूप में खाते हैं।

इस दिन ध्यान रखें:

  • लहसुन-प्याज़ बिल्कुल नहीं
  • खाना बनाने से पहले हाथ और रसोई पूरी तरह साफ हों
  • खाना बनाते समय चखना नहीं है
  • बर्तन अलग रखें, जो सिर्फ छठ के लिए इस्तेमाल हों

दूसरा दिन: खरना की विधि

खरना छठ का सबसे अहम पड़ाव है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं, यानी पानी तक नहीं पीते। शाम को सूर्यास्त के बाद पूजा होती है और उसके बाद ही व्रत खोला जाता है।

खरना का प्रसाद कैसे बनता है:
शाम को मिट्टी के नए चूल्हे पर, आम की लकड़ी जलाकर गुड़ की खीर बनाई जाती है। इसे रसिया या रसियाव भी कहते हैं। साथ में गेहूँ के आटे की रोटी या पूरी बनती है, और केला रखा जाता है। कई घरों में रोटी पर घी लगाया जाता है।

खरना की पूजा विधि:

  1. पूजा की जगह को गोबर या गंगाजल से शुद्ध करें।
  2. केले के पत्ते पर खीर, रोटी और फल रखें।
  3. दीपक जलाकर सूर्य देव और छठी मैया को भोग लगाएँ।
  4. व्रती एकांत में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस समय घर में शांति रखी जाती है, शोर बिल्कुल नहीं होता।
  5. उसके बाद परिवार और आस-पड़ोस के लोग प्रसाद लेते हैं।

खरना के प्रसाद के बाद से 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू होता है, जो चौथे दिन सुबह अर्घ्य के बाद ही खुलता है।

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य की विधि

तीसरे दिन की सुबह से ही घर में तैयारी शुरू हो जाती है। यही वो दिन है जब ठेकुआ बनता है और सूप-डलिया सजते हैं।

ठेकुआ कैसे बनता है:
गेहूँ का आटा, गुड़ (या चीनी), घी, सूखा नारियल और सौंफ मिलाकर आटा गूँथा जाता है। फिर लकड़ी के साँचे या चम्मच से डिज़ाइन बनाकर देसी घी में तल लिया जाता है। ये छठ का सबसे खास प्रसाद है। इसे बनाते समय भी वही शुद्धता वाला नियम लागू होता है।

डलिया (दौरा) कैसे सजाएँ:
बाँस की डलिया या सूप में सारे फल, ठेकुआ, गन्ना, नारियल और बाकी पूजा सामग्री रखी जाती है। इसके ऊपर कपड़ा ढक देते हैं। परिवार का कोई पुरुष सदस्य आमतौर पर इसे सिर पर रखकर घाट तक ले जाता है। रास्ते में छठ के गीत गाते हुए जाना बहुत आम है।

घाट पर संध्या अर्घ्य:

  1. सूर्यास्त से कुछ पहले घाट पर पहुँचें।
  2. व्रती कमर तक पानी में उतरकर खड़े होते हैं।
  3. सूप में दीया जलाकर और प्रसाद रखकर सूर्य की ओर हाथ जोड़ते हैं।
  4. परिवार के लोग कच्चे दूध या जल की धार से अर्घ्य देते हैं।
  5. सूप को हाथ में लेकर पाँच या सात बार परिक्रमा करने की परंपरा भी कई जगह है।

अर्घ्य देते समय मन में सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान रखें। मंत्र ज़रूरी नहीं है, लेकिन चाहें तो “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” बोल सकते हैं।

अर्घ्य के बाद सब घर लौट आते हैं। रात में कई परिवार कोसी भरने की रस्म निभाते हैं। ये मन्नत पूरी होने पर की जाती है। आँगन में गन्ने के बीच मिट्टी का हाथी रखकर दीये जलाए जाते हैं, और महिलाएँ मिलकर गीत गाती हैं।

चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण

चौथे दिन सब सूर्योदय से पहले, अक्सर अँधेरे में ही, घाट पहुँच जाते हैं। फिर वही प्रक्रिया दोहराई जाती है। फर्क बस इतना कि इस बार उगते सूर्य को अर्घ्य देना है।

व्रती पानी में खड़े होकर सूर्योदय का इंतज़ार करते हैं। जैसे ही सूर्य की पहली किरण दिखती है, अर्घ्य दिया जाता है। उसके बाद घाट पर ही छठी मैया से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।

पारण (व्रत खोलना):
अर्घ्य के बाद व्रती घर आकर या घाट पर ही सबसे पहले थोड़ा प्रसाद लेते हैं, फिर जल पीकर व्रत खोलते हैं। इसके बाद सादा भोजन किया जाता है। प्रसाद आस-पास के लोगों में बाँटा जाता है। छठ में प्रसाद माँगकर खाना भी शुभ माना जाता है।

छठ पूजा सामग्री लिस्ट

छठ की तैयारी में सबसे ज़्यादा परेशानी सामान जुटाने में आती है। इसलिए पहले से लिस्ट बना लेना अच्छा रहता है।

पूजा का मुख्य सामान:

  • बाँस के सूप और डलिया (दौरा)
  • मिट्टी का नया चूल्हा और आम की लकड़ी
  • नए मिट्टी के दीये
  • लाल या पीला कपड़ा
  • सिंदूर, रोली, अक्षत (साबुत चावल)
  • हल्दी, अदरक और मूली के पत्ते वाले पौधे
  • सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची
  • धूप, अगरबत्ती, कपूर
  • गंगाजल और कच्चा दूध
  • घी, रुई की बत्ती

फल और खाने की चीज़ें:

  • नारियल (पानी वाला)
  • केले का पूरा घौद (गुच्छा)
  • सेब, संतरा, अनानास, शरीफा
  • सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंद
  • नींबू (बड़ा वाला, डाभ नींबू)
  • गन्ना (कम से कम दो से पाँच डंडे)
  • गेहूँ का आटा, गुड़, सूखा नारियल, सौंफ (ठेकुआ के लिए)
  • अरवा चावल, चने की दाल, कद्दू, सेंधा नमक
  • चावल का आटा (कसार या लड्डू के लिए)

कपड़े और बाकी चीज़ें:

  • व्रती के लिए नई बिना सिली साड़ी या धोती
  • पूजा में बैठने के लिए साफ चटाई या आसन
  • घाट पर ले जाने के लिए पानी की बाल्टी, टॉर्च और कपड़े बदलने का इंतज़ाम

छठ पूजा के नियम

छठ को कठिन व्रत इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें कोई ढील नहीं चलती। मुख्य नियम ये हैं:

  • शुद्धता सबसे ऊपर: घर, रसोई, बर्तन और कपड़े, सब साफ हों। बाहर से आया सामान भी धोकर ही इस्तेमाल करें।
  • सात्विक खान-पान: पूरे चार दिन घर में लहसुन, प्याज़, माँस और शराब बिल्कुल वर्जित है।
  • ज़मीन पर सोना: व्रती आमतौर पर बिस्तर की जगह ज़मीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोते हैं।
  • जूठा न करें: प्रसाद या पूजा सामग्री को पहले खुद चखना या सूँघना मना है।
  • खरना के बाद निर्जला: खरना के प्रसाद से लेकर चौथे दिन के अर्घ्य तक अन्न-जल कुछ नहीं लिया जाता।
  • नई चीज़ों का इस्तेमाल: नया मिट्टी का चूल्हा, नए बर्तन और नए कपड़े अच्छे माने जाते हैं।
  • पूजा में क्रोध और बुरे शब्द नहीं: घर का माहौल शांत और भक्ति वाला रखना चाहिए।
  • ब्रह्मचर्य का पालन: पूरे व्रत के दौरान संयम रखना ज़रूरी माना गया है।

छठ पूजा में क्या न करें

कुछ बातें ऐसी हैं जो जाने-अनजाने में लोग कर देते हैं:

  • पूजा का सामान बिना नहाए हाथ न लगाएँ।
  • ठेकुआ या खीर बनाते समय बाल खुले न रखें।
  • कटे-फटे या सड़े हुए फल सूप में न रखें।
  • अर्घ्य के समय जूते-चप्पल पहनकर पानी में न उतरें।
  • प्रसाद ज़मीन पर सीधे न रखें, केले के पत्ते या साफ कपड़े का इस्तेमाल करें।
  • घर में कोई सूतक या जन्म-मृत्यु जैसी स्थिति हो तो पंडित जी या घर के बड़ों से सलाह लेकर ही व्रत शुरू करें।

छठ का प्रसाद और उसका महत्व

छठ का प्रसाद दूसरे व्रतों से थोड़ा अलग होता है, क्योंकि इसमें हर चीज़ मौसम की और धरती से जुड़ी होती है। ठेकुआ, गन्ना, सिंघाड़ा, सुथनी और नारियल, सबका कोई न कोई प्रतीक है। इसमें कोई महँगी मिठाई या डिब्बाबंद चीज़ नहीं होती। यही इस त्योहार की सुंदरता है कि अमीर-गरीब सब एक ही घाट पर, एक ही तरह के प्रसाद के साथ खड़े होते हैं।

छठ पूजा की तैयारी के लिए कुछ आसान टिप्स

1. समय से पहले लिस्ट बना लें। खरीदारी का काम आखिरी दिन के लिए न छोड़ें। नहाय खाय से दो-तीन दिन पहले ही बाँस का सूप, मिट्टी का चूल्हा और गन्ना ले आएँ, क्योंकि त्योहार के पास आते ही बाज़ार में भीड़ और रेट दोनों बढ़ जाते हैं।

2. फल ताज़े और साबुत लें। घाट तक ले जाते समय फल खराब न हों, इसके लिए थोड़ा सख़्त फल चुनें।

3. घाट की जानकारी पहले से रखें। अगर आप किसी नई जगह पर हैं, तो पहले ही पता कर लें कि सबसे पास का साफ घाट कौन सा है। घर की छत या सोसाइटी में बने कृत्रिम तालाब में भी अर्घ्य देने की व्यवस्था अब कई जगह होती है।

4. बुज़ुर्गों से पूछें। हर परिवार की अपनी परंपरा होती है। कहीं सूप में 5 फल रखते हैं, कहीं 11। कहीं कोसी घर पर भरते हैं, कहीं घाट पर। इसलिए अपने घर के बड़ों से ज़रूर पूछ लें, यही सबसे सही तरीका है।

5. व्रती की सेहत का ध्यान रखें। 36 घंटे का निर्जला व्रत आसान नहीं होता। पहले दो दिन हल्का और पौष्टिक खाना खाएँ, शरीर में पानी की कमी न होने दें। कोई बीमारी या दवा चल रही हो तो डॉक्टर से सलाह ले लें।

छठ पूजा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. छठ पूजा कब से शुरू होती है और कितने दिन चलती है?

छठ पूजा चतुर्थी तिथि पर नहाय खाय से शुरू होती है और सप्तमी के दिन उषा अर्घ्य व पारण के साथ पूरी होती है। कुल चार दिन चलती है।

Q2. क्या छठ पूजा पुरुष भी कर सकते हैं?

हाँ, बिल्कुल। छठ व्रत महिलाएँ और पुरुष, दोनों रखते हैं। बिहार और झारखंड में बहुत से पुरुष भी पूरी निष्ठा से छठ करते हैं।

Q3. खरना में क्या खाया जाता है?

खरना की शाम को गुड़ की खीर, गेहूँ की रोटी और केला प्रसाद के रूप में लिया जाता है। उसके बाद निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

Q4. क्या छठ में सिला हुआ कपड़ा पहन सकते हैं?

पारंपरिक रूप से बिना सिले कपड़े, जैसे साड़ी और धोती, शुभ माने जाते हैं। लेकिन कई जगह आज के समय में साफ और नए कपड़े पहनने की छूट भी दी जाती है। यहाँ अपने परिवार की परंपरा ही आखिरी बात है।

Q5. छठ व्रत एक बार शुरू करने के बाद छोड़ सकते हैं?

आमतौर पर छठ व्रत एक बार शुरू करने पर हर साल रखा जाता है। इसे छोड़ना तभी ठीक माना जाता है जब घर में कोई सूतक हो या व्रती की तबीयत बहुत खराब हो। ऐसी स्थिति में परिवार का दूसरा सदस्य व्रत आगे बढ़ा सकता है, पर पंडित या घर के बड़ों से सलाह ज़रूर लें।

Q6. अर्घ्य देते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

कोई तय मंत्र ज़रूरी नहीं है। मन से सूर्य देव और छठी मैया को याद करना ही सबसे ज़रूरी है। फिर भी “ॐ सूर्याय नमः” का जाप किया जा सकता है।

Q7. अगर घाट पर न जा सकें तो क्या करें?

घर के आँगन, छत या बड़े टब में पानी भरकर भी अर्घ्य दिया जा सकता है। आजकल शहरों में ये काफी चलन में है।

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Laxmi Nautiyal

लक्ष्मी नौटियाल पिछले 5 सालों से कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें न्यूज, राजनीति, शिक्षा, मनोरंजन, खेल, बिजनेस और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वह इससे पहले कई वेबसाइट्स के लिए काम कर चुकी हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना है। वह हर विषय पर रिसर्च करके ऐसा कंटेंट लिखने की कोशिश करती हैं, जिसे पाठक आसानी से समझ सकें और जिससे उन्हें जरूरी जानकारी मिल सके।

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