SIM Card Check: आपके नाम पर कितने सिम चल रहे हैं, यह जानने के लिए संचार साथी पोर्टल पर “Know Your Mobile Connections” टूल खोलिए। अपना मोबाइल नंबर डालिए, OTP भरिए, और आपकी पहचान पर दर्ज सारे नंबरों की सूची सामने आ जाएगी। इसमें दो-तीन मिनट लगते हैं और कोई पैसा नहीं लगता।
अभी चेक करने की एक वजह और है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 17 अगस्त के सर्कुलर में टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया कि 24 अगस्त 2026 से वे सीमा पूरी कर चुके लोगों को नया कनेक्शन न दें। अगर आपके नाम पर आपकी जानकारी के बिना कुछ नंबर चल रहे हैं, तो वे भी इसी गिनती में जुड़ते हैं।
संचार साथी पर सिम कैसे चेक करें
तरीका सीधा है। एक बार करके देख लीजिए, फिर याद रहेगा।
- फ़ोन या कंप्यूटर के ब्राउज़र में sancharsaathi.gov.in खोलिए। सीधे TAFCOP पर जाना हो तो tafcop.sancharsaathi.gov.in भी चलेगा।
- होमपेज पर “Citizen Centric Services” वाले हिस्से में “Know Your Mobile Connections” पर टैप कीजिए।
- अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर और स्क्रीन पर दिखा कैप्चा डालिए।
- उसी नंबर पर एक OTP आएगा। उसे भरकर लॉगिन कीजिए।
- पोर्टल आपके नाम पर दर्ज नंबरों की एक आंशिक रूप से छिपी हुई सूची दिखाता है।
यानी पूरा नंबर नहीं दिखेगा, बस शुरू और आख़िर के कुछ अंक। आम तौर पर इतना पहचानने के लिए काफ़ी होता है कि कौन-सा नंबर आपका अपना है।
Sanchar Saathi का मोबाइल ऐप भी है। वहाँ भी यही विकल्प मिलता है, और जो लोग हर काम फ़ोन से करते हैं उनके लिए वही आसान पड़ेगा।
एक आईडी पर कितने सिम चल सकते हैं
ज़्यादातर लोगों को लगता है कि ऐसी कोई सीमा नहीं है। है, और काफ़ी पुरानी है। एक व्यक्ति सभी टेलीकॉम कंपनियों को मिलाकर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है, जबकि जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 है।
इसमें एक बारीक बात है, जो अक्सर छूट जाती है। यह सीमा सभी ऑपरेटरों को जोड़कर गिनी जाती है, किसी एक कंपनी के हिसाब से अलग-अलग नहीं। मतलब Jio में चार, Airtel में चार और Vi में चार लेकर आप बच नहीं सकते। कुल गिनती 12 हुई, और वह सीमा से ऊपर है।
अब सोचिए कि आपके नाम पर कितने सिम होंगे। फ़ोन के लिए एक या दो, शायद एक पुराना नंबर जो अब इस्तेमाल नहीं होता, एक डेटा सिम या वर्क सिम। यह पाँच-छह तक आराम से पहुँच जाता है। उसमें कोई अनजान नंबर जुड़ जाए तो आपको पता भी नहीं चलेगा। इसलिए सूची देखना ज़रूरी है।
24 अगस्त 2026 से क्या बदला
सबसे पहले यह समझ लीजिए कि यह कोई नई सीमा नहीं है। यह निर्देश मौजूदा नियम को मज़बूत करता है, कोई नई संख्या नहीं थोपता। बदलाव यह है कि अब इसे लागू करने के तरीके कड़े हुए हैं।
पहले होता यह था कि सीमा काग़ज़ पर थी, पर अलग-अलग कंपनियों के बीच डेटा का मिलान ठीक से नहीं होता था। इसी कमी का फ़ायदा उठाकर कुछ लोग अलग-अलग ऑपरेटरों से ज़्यादा कनेक्शन ले लेते थे। अब DoT के Digital Intelligence Platform पर सारा डेटा एक जगह जुड़ा रहेगा, फ़ोटो से पहचान की जाँच होगी, और सीमा पूरी कर चुके व्यक्ति को नया कनेक्शन देने से मना करना होगा। कंपनियाँ आपसे यह घोषणा भी माँग सकती हैं कि आपके पास पहले से कितने कनेक्शन हैं।
घबराने की ज़रूरत नहीं है। सीमा तक पहुँच चुके व्यक्ति के मौजूदा नंबर 24 अगस्त को अचानक बंद नहीं हो जाते। पर शुरुआती दौर में सीमा से ऊपर चालू हुआ कोई भी कनेक्शन तुरंत सस्पेंड किया जाएगा, जब तक मामला सुलझ न जाए। पूरी व्यवस्था रीयल-टाइम में नवंबर 2026 के अंत तक लागू होनी है, यानी अब बस कुछ ही हफ़्ते बचे हैं।
लिस्ट में अनजान नंबर दिखे तो क्या करें
पहली बार सूची देखने पर कई लोग चौंक जाते हैं। कोई नंबर पहचान में नहीं आता, तो पहले एक बात देख लीजिए। क्या वह कभी परिवार के किसी सदस्य के लिए आपके दस्तावेज़ पर लिया गया था? कई बार घर के बुज़ुर्ग या बच्चे का सिम किसी और की आईडी पर चलता रहता है, और याद नहीं रहता।
अगर वाकई नहीं पहचान पा रहे, तो हर नंबर के आगे तीन विकल्प मिलते हैं:
- This is not my number: जब नंबर आपका है ही नहीं और आपने कभी लिया ही नहीं।
- Not required: जब नंबर आपका ही है, पर अब ज़रूरत नहीं।
- Required: जब नंबर आपका है और आप उसे चालू रखना चाहते हैं।
विकल्प चुनकर रिपोर्ट बटन दबाइए। आपको एक शिकायत ID मिलेगी, उसे संभालकर रखिए। इसी से आगे स्टेटस देखा जाता है। सीमा से ज़्यादा जो कनेक्शन बाद में चालू हुए, उन्हें सेवा प्रदाता को बंद करना होता है। इसमें कुछ दिन लग सकते हैं, तब तक बीच-बीच में पोर्टल पर स्टेटस देखते रहिए।
अगर किसी अनजान नंबर से ठगी या धमकी की घटना भी हुई हो, तो सिर्फ़ पोर्टल पर रिपोर्ट करके न रुकें। साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कीजिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करवाइए।
आपके नाम पर फ़र्ज़ी सिम चलना क्यों भारी पड़ सकता है
यह सिर्फ़ गिनती का मामला नहीं है। जिस सिम से कोई ठगी करता है, पुलिस की जाँच उसी नंबर के रजिस्टर्ड मालिक तक पहुँचती है। यानी जिसके दस्तावेज़ पर नंबर चल रहा है, उसे ही पहले सवालों का सामना करना पड़ता है। बाद में आप साबित कर देंगे कि सिम आपने नहीं लिया, पर तब तक की परेशानी आपके सिर आती है।
क़ानून भी इस पर सख़्त है। दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(3)(e) धोखाधड़ी, छल या किसी और की पहचान बनाकर सिम लेने को अपराध मानती है। इसमें तीन साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, और ये अपराध संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती हैं।
एक बात यहाँ साफ़ कर देनी चाहिए, ताकि कोई ग़लत नतीजा न निकाल ले। यह सज़ा फ़र्ज़ी दस्तावेज़ से सिम लेने वाले के लिए है, उसके लिए नहीं जिसके दस्तावेज़ का दुरुपयोग हुआ। पर विभाग की चेतावनी यह भी है कि अपने नाम पर लिया सिम किसी और को थमाना जोखिम भरा है, क्योंकि उसका दुरुपयोग हो सकता है। इसलिए “बस एक दिन के लिए चाहिए” वाले अनुरोध पर सावधान रहिए, चाहे माँगने वाला कितना भी जान-पहचान का हो।
इसके अलावा बैंक OTP, UPI और कई सरकारी सेवाओं की पहचान आपके मोबाइल नंबर से जुड़ी होती है। अगर कोई आपके नाम पर सिम लेकर पुराने नंबर की जगह दूसरा सिम चालू करवा ले, तो ठगी का रास्ता और आसान हो जाता है।
जो सिम अब इस्तेमाल नहीं करते, उनका क्या करें
हम सबके पास कोई न कोई सिम पड़ा होता है जो साल भर से किसी काम का नहीं। उसे यूँ ही छोड़ देना ठीक नहीं है। पोर्टल पर उस नंबर के आगे “Not required” चुनकर रिपोर्ट कीजिए, और साथ में ऑपरेटर के कस्टमर केयर या नज़दीकी स्टोर से भी बंद करवा लें। जो सिम बंद हो जाता है, वह आपकी सीमा में गिना जाना भी बंद हो जाता है।
ऐसी जाँच साल में दो-तीन बार कर लेना ठीक रहेगा। नया सिम लेने से पहले और उसके बाद, दोनों बार देख लें। कुछ मिनट का काम है, पर आपके दस्तावेज़ की निगरानी अपने हाथ में रहती है।
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