LPG Cylinder Expiry Date: कैसे चेक करें, सिलेंडर की सुरक्षा की जानकारी कैसे जांचें

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LPG Cylinder Expiry Date: LPG सिलेंडर की एक्सपायरी जांचने के लिए उसके ऊपरी हिस्से में लगी तीन खड़ी पट्टियों में से किसी एक पर देखिए। वहां A-27, B-26 या D-26 जैसा कोड लिखा होता है। अक्षर बताता है कि जांच साल की किस तिमाही में होनी है और साथ के दो अंक उस साल को बताते हैं। यानी D-26 का मतलब है कि सिलेंडर की अगली जांच 2026 की आखिरी तिमाही, यानी अक्टूबर से दिसंबर के बीच होनी है। एक बात ध्यान रखिए कि यह एक्सपायरी डेट नहीं, जांच की तारीख है। इंडियन ऑयल ने साफ कहा है कि LPG सिलेंडर की एक्सपायरी डेट नहीं होती, सिर्फ टेस्ट ड्यू डेट होती है। फिर भी यह तारीख देखना और सिलेंडर की बाकी सुरक्षा जांचें करना हर घर के लिए जरूरी है। नीचे कोड पढ़ने से लेकर लीकेज की जांच, आपात स्थिति और शिकायत तक की जानकारी आसान भाषा में दी गई है।

सिलेंडर पर कोड कहां लिखा होता है

सिलेंडर के ऊपर हैंडल की तरह एक गोल घेरा होता है, जिसे कॉलर या शील्ड कहते हैं। इसे सिलेंडर से जोड़ने वाली तीन खड़ी पट्टियां होती हैं, जिन्हें स्टे प्लेट कहा जाता है। इनमें से किसी एक पर कोड पेंट या स्टैंसिल से लिखा मिलता है। कई बार सिलेंडर पर धूल, पुराना पेंट या जंग जमा होता है और कोड साफ नहीं दिखता। ऐसे में कपड़े से हल्का पोंछ लें और टॉर्च की रोशनी में देखें।

कॉलर और पट्टियों पर आम तौर पर कुछ और निशान भी होते हैं, जैसे सिलेंडर का क्रमांक और खाली सिलेंडर का वजन। इन सबके बीच आपको वही कोड देखना है जो A, B, C या D से शुरू होता हो। यही आपके सिलेंडर की अगली जांच की तारीख है।

कोड को सही तरह से कैसे पढ़ें

कोड में अंग्रेजी का अक्षर तिमाही बताता है। साल को चार तिमाहियों में बांटा गया है और हर अक्षर एक तिमाही के लिए है:

  • A: जनवरी से मार्च, यानी पहली तिमाही
  • B: अप्रैल से जून, यानी दूसरी तिमाही
  • C: जुलाई से सितंबर, यानी तीसरी तिमाही
  • D: अक्टूबर से दिसंबर, यानी चौथी तिमाही

अक्षर के बाद लिखे दो अंक उस साल के आखिरी दो अंक होते हैं, जिसमें जांच होनी है। उदाहरण के लिए A-27 का मतलब है कि सिलेंडर 2027 की जनवरी से मार्च वाली तिमाही तक इस्तेमाल के लिए ठीक माना जाएगा और उसके बाद उसे जांच के लिए जाना है। कुछ सिलेंडरों पर साल चार अंकों में भी लिखा मिलता है, जैसे B 2027। मतलब वही रहता है।

अब एक उदाहरण आज की तारीख के हिसाब से लीजिए। मान लीजिए अभी अक्टूबर 2026 है। D-26 वाला सिलेंडर इसी तिमाही यानी दिसंबर 2026 तक जांच के दायरे में ठीक है, जबकि C-26 वाले सिलेंडर की तारीख सितंबर 2026 में पूरी हो चुकी है। ऐसा सिलेंडर आपके घर तक पहुंचना नहीं चाहिए।

एक्सपायरी नहीं, टेस्ट ड्यू डेट क्यों कहा जाता है

एक्सपायरी शब्द आमतौर पर दवा या खाने की चीजों के लिए इस्तेमाल होता है, जिनकी तय अवधि के बाद गुणवत्ता खराब हो जाती है। LPG सिलेंडर स्टील का बना होता है और उसकी असली परख इस बात से होती है कि उसकी मजबूती और जोड़ ठीक हैं या नहीं। इसीलिए तय समय पर उसकी वैधानिक जांच होती है। एक तेल कंपनी की जानकारी के मुताबिक यह जांच आम तौर पर हर 5 साल में होती है।

जांच में हाइड्रोस्टैटिक टेस्ट जैसी प्रक्रिया शामिल होती है, जिसमें सिलेंडर की मजबूती और संभावित रिसाव परखा जाता है। इंडियन ऑयल के बयान के मुताबिक जिन सिलेंडरों की जांच का समय आ जाता है, उन्हें बॉटलिंग प्लांट में अलग किया जाता है और मान्यता प्राप्त ठेकेदारों के जरिए उनकी जांच होती है। जो सिलेंडर दोबारा इस्तेमाल के लायक पाए जाते हैं, उन पर अगली जांच की तारीख लिखी जाती है और उन्हें फिर से भरने के लिए भेजा जाता है।

यह भी जान लें कि अगर घर में कोई पुराना सिलेंडर बरसों से बेकार पड़ा है और उसकी तारीख निकल चुकी है, तो उसकी जांच तभी होती है जब वह वापस चलन में आता है। ऐसे सिलेंडर को खुद इस्तेमाल करने की जगह अपने डिस्ट्रीब्यूटर को लौटाना बेहतर है।

तारीख निकल चुकी हो तो क्या करें

इंडियन ऑयल का कहना है कि जांच की तारीख पार कर चुके सिलेंडर बाजार में नहीं भेजे जाते और सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को डिलीवरी से पहले यह जांचने के निर्देश हैं। फिर भी इंसानी चूक की गुंजाइश रहती है, इसलिए खुद देख लेना सही है।

अगर डिलीवरी के वक्त आपको दिखे कि कोड की तारीख बीत चुकी है, तो सिलेंडर लेने से पहले ही डिलीवरी करने वाले को बताइए और उसे बदलवाने के लिए कहिए। अगर सिलेंडर घर में लग चुका है, तब भी अपने डिस्ट्रीब्यूटर को फोन करके बदलवाएं। बात न बने तो अपनी गैस कंपनी की टोल-फ्री शिकायत लाइन पर शिकायत दर्ज करें। इंडेन और एचपी गैस के लिए यह नंबर 1800-2333-555 है, बाकी कंपनियों का नंबर आपकी गैस रसीद पर छपा होता है।

डिलीवरी के समय सिलेंडर में और क्या देखें

सिर्फ तारीख काफी नहीं है। सिलेंडर घर में रखवाने से पहले दरवाजे पर ही कुछ मिनट लगाकर उसे ऊपर से नीचे तक देख लें।

सबसे पहले वाल्व के ऊपर लगी सील देखिए। वह टूटी या हटी हुई नहीं होनी चाहिए। फिर पूरे सिलेंडर को घुमाकर देखिए कि कहीं बड़ा गड्ढा, पिचका हुआ हिस्सा या गहरा जंग तो नहीं है। वाल्व के पास हल्की सी भी गैस की गंध आए तो उसे न लें। गैस की गंध इसलिए डाली जाती है ताकि रिसाव तुरंत पता चल जाए।

वजन की जांच भी हो सकती है। भरे सिलेंडर के सही वजन की जानकारी अपने डिस्ट्रीब्यूटर से लें और चाहें तो डिलीवरी के समय तौलवाकर देख लें। घरेलू सिलेंडर में गैस की मात्रा 14.2 किलो होती है, लेकिन खाली सिलेंडर का वजन हर सिलेंडर पर अलग लिखा रहता है, इसलिए कुल वजन का हिसाब उसी के साथ जोड़कर देखें।

रेगुलेटर, पाइप और चूल्हे की जांच

अक्सर रिसाव सिलेंडर से नहीं, उससे जुड़े सामान से होता है। रेगुलेटर वह पुर्जा है जो सिलेंडर के वाल्व पर लगता है और गैस के दबाव को काबू में रखता है। इसकी रबर की रिंग घिस गई हो या वह ढीला लगा हो तो गैस रिस सकती है। सिलेंडर बदलते समय इसे सीधा और पूरा बैठाएं और हर बार जांच लें।

गैस पाइप के लिए ISI मार्क वाला सुरक्षा होज इस्तेमाल करना चाहिए। गैस कंपनियां अपनी रसीदों पर सुरक्षा होज बदलने की याद दिलाती हैं और कहती हैं कि होज पर छपी तारीख देखें। इसलिए पाइप पर लिखी तारीख जरूर पढ़ें। पाइप में दरार, कटाव, सख्ती या पिघलने के निशान दिखें तो उसे तुरंत बदलवाएं। पाइप के दोनों सिरों पर क्लैंप कसे हुए होने चाहिए।

चूल्हे के बर्नर और नॉब भी देखते रहें। बर्नर के छेद बंद हों या लौ नीली की जगह पीली-नारंगी आए तो उसे साफ करवाएं या ठीक करवाएं। सुरक्षा की दृष्टि से मरम्मत का काम किसी जानकार मैकेनिक से ही करवाएं।

घर पर लीकेज की जांच कैसे करें

लीकेज की जांच का सबसे आसान तरीका साबुन का घोल है। थोड़े पानी में अच्छी तरह साबुन घोलकर गाढ़ा झागदार घोल बना लें और उसे ब्रश या स्पंज से सिलेंडर के वाल्व, रेगुलेटर के जोड़, पाइप के दोनों सिरों और चूल्हे के जोड़ पर लगाएं। जहां से गैस निकल रही होगी, वहां बुलबुले बनने लगेंगे। बड़े बुलबुले जल्दी बनें तो रिसाव ज्यादा है और छोटे बुलबुले धीरे बनें तो हल्का रिसाव है। जांच के दौरान माचिस, लाइटर या किसी भी तरह की लौ का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

इसके अलावा बाजार में LPG गैस डिटेक्टर भी मिलते हैं, जिनकी कीमत आम तौर पर 500 से 2,000 रुपये के बीच रहती है। LPG हवा से भारी होती है और फर्श के पास जमा होती है, इसलिए डिटेक्टर को जमीन के पास लगाना चाहिए। डिटेक्टर लेते समय भरोसेमंद ब्रांड देखें और उसकी बैटरी या बिजली की जांच समय-समय पर करते रहें।

गैस लीक हो जाए तो तुरंत क्या करें

गैस की तेज गंध आए तो घबराने की जगह नीचे लिखे क्रम में काम करें:

  1. चूल्हा, दिया, अगरबत्ती और बाकी सभी लौ तुरंत बंद करें या हटा दें।
  2. बिजली का कोई भी स्विच न दबाएं, चाहे बल्ब या पंखा हो या कुछ और। चिंगारी से आग लग सकती है।
  3. खिड़की और दरवाजे खोलकर कमरे में हवा आने दें।
  4. अगर सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके तो रेगुलेटर बंद करें और वाल्व पर सेफ्टी कैप लगा दें।
  5. सिलेंडर को इधर-उधर न खिसकाएं।
  6. जरूरत लगे तो घर के सभी लोगों को बाहर निकाल दें और बाहर जाकर फोन करें।

फोन करने के लिए 1906 डायल करें। यह LPG रिसाव की शिकायत के लिए तेल कंपनियों की 24 घंटे चलने वाली राष्ट्रीय आपात हेल्पलाइन है। इस पर कॉल के लिए कोई पैसा नहीं लगता। यह हिंदी और अंग्रेजी के साथ कई और भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और पड़ोसी के घर में रिसाव होने पर भी आप इस नंबर पर सूचना दे सकते हैं। अपने डिस्ट्रीब्यूटर का नंबर भी फोन में सेव रखें।

रोजमर्रा की आदतें जो खतरा घटाती हैं

सिलेंडर को हमेशा सीधा खड़ा रखें और कभी लिटाएं या उलटा न करें। उसे हवादार जगह पर रखें, जहां सीधी गर्मी या धूप न पड़े। बंद, गर्म और बिना हवा वाली जगह पर रिसाव होने पर गैस जमा होती जाती है।

खाना बनाने के बाद रेगुलेटर का स्विच बंद करने की आदत डालें, खासकर रात को सोने से पहले और घर से बाहर जाते समय। चूल्हा जलाने से पहले भी एक बार सूंघकर देख लें कि गैस की गंध तो नहीं है। सिलेंडर के पास पुराने कपड़े, कागज या तेल जैसी जलने वाली चीजें न रखें। बच्चों को सिलेंडर और चूल्हे से दूर रखें और उन्हें रेगुलेटर छूना न सिखाएं।

सिलेंडर खत्म होने पर नया लगाते समय वाल्व पर लगी सेफ्टी कैप को संभालकर रखें और पुराने सिलेंडर पर वापस लगा दें। यह छोटी सी आदत रिसाव से बचाती है।

बीमा और शिकायत की जानकारी

तेल कंपनियां LPG से जुड़े हादसों के लिए सार्वजनिक देयता बीमा (पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस) लेती हैं। इंडेन की रसीदों में लिखा रहता है कि यह बीमा मुख्य रूप से गैस रिसाव से हुए हादसों में जान और संपत्ति के नुकसान को कवर करता है। वहीं रसीद में यह शर्त भी लिखी होती है कि हादसे की सूचना 90 दिन के अंदर देनी जरूरी है, इसके बाद कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए कभी हादसा हो जाए तो तुरंत अपने डिस्ट्रीब्यूटर को लिखित या फोन से सूचना दें और गैस की रसीद व कनेक्शन के कागज संभालकर रखें। दावे की पूरी प्रक्रिया और राशि की जानकारी अपने डिस्ट्रीब्यूटर या गैस कंपनी के दफ्तर से पूछ लें।

अगर सिलेंडर में खराबी, तारीख निकले सिलेंडर की डिलीवरी या सेवा से जुड़ी कोई और दिक्कत हो, तो पहले डिस्ट्रीब्यूटर को बताएं। बात न बने तो गैस कंपनी की टोल-फ्री लाइन पर शिकायत करें। इंडेन के मामले में ऑनलाइन शिकायत करने पर एक सर्विस रिक्वेस्ट नंबर मिलता है, जिससे आप शिकायत की स्थिति देख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसी नंबर के साथ कॉल करके मामला आगे बढ़ा सकते हैं। इसलिए शिकायत दर्ज करते समय वह नंबर लिखकर रख लें।

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Laxmi Nautiyal

लक्ष्मी नौटियाल पिछले 5 सालों से कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें न्यूज, राजनीति, शिक्षा, मनोरंजन, खेल, बिजनेस और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वह इससे पहले कई वेबसाइट्स के लिए काम कर चुकी हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना है। वह हर विषय पर रिसर्च करके ऐसा कंटेंट लिखने की कोशिश करती हैं, जिसे पाठक आसानी से समझ सकें और जिससे उन्हें जरूरी जानकारी मिल सके।

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