Diwali Lakshmi Puja Vidhi: दिवाली की रात घर में दीये जलते हैं, मिठाइयाँ बँटती हैं, और असली पूजा होती है लक्ष्मी-गणेश की। हर साल कई लोगों के मन में यही सवाल रहता है कि पूजा किस समय करें, चौकी कैसे सजाएँ, कौन सी चीज़ कहाँ रखें और कौन सा मंत्र बोलें। इस लेख में दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि, पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट और ज़रूरी नियम आसान भाषा में मिल जाएँगे, ताकि आप बिना किसी टेंशन के घर पर पूजा कर सकें।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा क्यों होती है?
दिवाली कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा धन, सुख और समृद्धि के लिए होती है, और गणेश जी की पूजा इसलिए कि कोई भी शुभ काम उनके बिना शुरू नहीं होता। गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता हैं। मान्यता है कि सिर्फ धन आ जाना काफी नहीं, उसे सही तरीके से संभालने की समझ भी चाहिए, इसीलिए दोनों की पूजा साथ होती है।
इसके पीछे एक और कथा है कि समुद्र मंथन में माँ लक्ष्मी इसी तिथि के आसपास प्रकट हुई थीं। वहीं उत्तर भारत में लोग इसे भगवान राम के अयोध्या लौटने से भी जोड़ते हैं। कहानी चाहे कोई भी सुनाई जाए, भाव एक ही है: घर में रोशनी, सकारात्मकता और बरकत आए।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त कैसे चुनें?
दिवाली पूजा में मुहूर्त का बहुत महत्व माना जाता है। आमतौर पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है, यानी सूर्यास्त के बाद का वो समय जब अँधेरा शुरू होता है और करीब ढाई घंटे तक चलता है। इसमें भी स्थिर लग्न को सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी घर में टिकती हैं।
कुछ बातें ध्यान रखें:
- अमावस्या तिथि कभी-कभी दो दिन में बँट जाती है, इसलिए तारीख को लेकर confusion हो सकता है
- हर शहर का सूर्यास्त अलग होता है, तो मुहूर्त भी थोड़ा आगे-पीछे होता है
- सबसे सही तरीका ये है कि अपने शहर का पंचांग देखें या घर के पंडित जी से पूछ लें
- व्यापारी लोग कई बार निशीथ काल या महानिशीथ काल में भी पूजा करते हैं
अगर किसी वजह से सही मुहूर्त निकल जाए, तो घबराइए मत। प्रदोष काल के आसपास शांत मन से की गई पूजा भी स्वीकार होती है। भाव ज़्यादा मायने रखता है।
पूजा से पहले की तैयारी
पूजा की असली तैयारी दो-तीन दिन पहले से शुरू हो जाती है।
घर की सफाई: धनतेरस से पहले ही घर की अच्छी तरह सफाई कर लें। मान्यता है कि माँ लक्ष्मी साफ-सुथरे घर में ही आती हैं। जाले हटाएँ, टूटा-फूटा और बेकार सामान बाहर करें।
मुख्य द्वार और रंगोली: दरवाज़े पर तोरण या आम के पत्तों की बंदनवार लगाएँ। आँगन या दरवाज़े के बाहर रंगोली बनाएँ, और अगर चाहें तो माँ लक्ष्मी के छोटे पैर के निशान भी बना सकते हैं, जो अंदर की तरफ आते हुए दिखें।
पूजा की जगह: घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा करने वाले का मुँह पूर्व या उत्तर की तरफ हो तो अच्छा रहता है।
स्नान और कपड़े: पूजा से पहले नहा लें और साफ या नए कपड़े पहनें। कई घरों में महिलाएँ लाल, पीले या गुलाबी रंग के कपड़े पहनती हैं।
दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट
अक्सर पूजा के बीच में याद आता है कि कुछ सामान रह गया। इसलिए पहले से ये लिस्ट बना लें।
मूर्ति और चौकी का सामान:
- लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति या फोटो (मिट्टी की मूर्ति सबसे अच्छी मानी जाती है)
- लकड़ी की चौकी
- लाल या पीला कपड़ा
- कलश (ताँबे या पीतल का)
- आम के पत्ते और साबुत नारियल
- चाँदी या सोने का सिक्का, कुछ नोट
पूजन सामग्री:
- रोली, कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), हल्दी
- चंदन, सिंदूर, मौली (कलावा)
- सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची
- धूप, अगरबत्ती, कपूर
- घी और सरसों के तेल के दीये, रुई की बत्ती
- गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- इत्र
फूल और पत्ते:
- कमल का फूल (माँ लक्ष्मी को सबसे प्रिय)
- गेंदे के फूल और माला
- गणेश जी के लिए दूर्वा (हरी घास)
भोग और प्रसाद:
- खील और बताशे
- मिठाई (लड्डू, मोदक, बर्फी)
- मौसमी फल, सिंघाड़ा
- गन्ना
- खीर या हलवा
शुभ और विशेष चीज़ें:
- कमलगट्टा
- कौड़ी और गोमती चक्र
- साबुत धनिया और जीरा
- नई बही, खाता या कलम (व्यापारी वर्ग के लिए)
- लक्ष्मी जी के साथ कुबेर यंत्र या श्रीयंत्र (जिनके यहाँ परंपरा हो)
अगर सब कुछ न मिल पाए तो परेशान न हों। रोली, चावल, फूल, दीया, मिठाई और सच्चे मन से की गई प्रार्थना से भी पूजा पूरी मानी जाती है।
चौकी कैसे सजाएँ और मूर्तियाँ कैसे रखें?
- चौकी को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
- मूर्तियाँ इस तरह रखें कि गणेश जी माँ लक्ष्मी के बाईं ओर हों।
- चौकी के पास पानी से भरा कलश रखें, उसके मुँह पर आम के पत्ते लगाएँ और ऊपर नारियल रखें।
- चौकी के सामने थोड़े चावल या गेहूँ की ढेरी बनाकर उस पर दीया रखें।
- मूर्ति के पास चाँदी का सिक्का, नोट और सोने-चाँदी के गहने रख सकते हैं।
- दाईं तरफ घी का दीया और बाईं तरफ तेल का दीया रखें।
अगर घर में पुरानी मूर्ति है तो उसकी भी पूजा हो सकती है, पर परंपरा के हिसाब से हर साल नई मूर्ति लाना शुभ माना जाता है। पुरानी मूर्ति को नदी या तालाब में विसर्जित कर सकते हैं या पीपल के पेड़ के नीचे रख सकते हैं।
लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि: step by step
अब असली पूजा शुरू करते हैं। पूरी प्रक्रिया आराम से और बिना जल्दबाज़ी के करें।
1. आचमन और शुद्धि
सबसे पहले आसन पर बैठकर तीन बार आचमन करें, यानी दाएँ हाथ में थोड़ा जल लेकर पिएँ। फिर अपने ऊपर और पूजा की चीज़ों पर गंगाजल छिड़कें।
2. संकल्प
हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें कि आप आज अपना नाम, गोत्र और परिवार के कल्याण के लिए लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर रहे हैं। पंडित जी हों तो वो संकल्प बुलवा देंगे। अगर खुद कर रहे हैं तो सरल भाषा में मन की बात कहकर जल नीचे छोड़ दें।
3. गणेश पूजन
सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है। उन्हें रोली-चावल का तिलक करें, दूर्वा और फूल चढ़ाएँ, मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ। गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती, ये बात याद रखें। पूजा के समय मंत्र बोलें: ॐ गं गणपतये नमः।
4. कलश पूजन
कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ, मौली बाँधें और चावल-फूल चढ़ाएँ। कलश को वरुण देव का प्रतीक माना जाता है और ये पूजा में शुभता का आधार होता है।
5. माँ लक्ष्मी का आवाहन और पूजन
माँ लक्ष्मी की मूर्ति पर पहले जल या गंगाजल से अभिषेक करें। कई लोग पंचामृत से भी स्नान कराते हैं। फिर साफ कपड़े से पोंछकर वापस चौकी पर रखें। इसके बाद:
- रोली, चंदन और सिंदूर का तिलक लगाएँ
- कमल या गेंदे के फूल की माला पहनाएँ
- इत्र छिड़कें
- धूप-दीप दिखाएँ
- खील-बताशे, मिठाई और फल का भोग लगाएँ
- कमलगट्टा, कौड़ी और सिक्के अर्पित करें
बीच-बीच में माँ लक्ष्मी का ध्यान करते रहें और पूजा के दौरान ये मंत्र बोल सकते हैं:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
या फिर सरल रूप में: ॐ महालक्ष्म्यै नमः।
6. कुबेर और अन्य देवताओं का पूजन
अगर आपकी परंपरा है तो कुबेर जी, सरस्वती जी और बही-खाते की भी पूजा करें। व्यापारी लोग इस दिन नई बही पर स्वस्तिक बनाकर “शुभ-लाभ” लिखते हैं। तिजोरी या गल्ले की भी रोली-चावल से पूजा होती है।
7. दीपक जलाना
पूजा में सबसे ज़रूरी हिस्सा है दीप प्रज्वलन। एक बड़ा घी का दीया माँ लक्ष्मी के सामने जलाएँ, जो रात भर जलता रहे। इसके बाद घर के हर कोने में दीये जलाएँ: रसोई, मंदिर, आँगन, छत, तुलसी के पास और मुख्य द्वार पर।
8. आरती
अब सभी लोग साथ खड़े होकर “ॐ जय लक्ष्मी माता” की आरती गाएँ। आरती के बाद गणेश जी की आरती भी करें। परिवार के सब सदस्य हाथ से आरती लें और माथे पर लगाएँ।
9. क्षमा प्रार्थना और प्रसाद
पूजा के अंत में हाथ जोड़कर जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा माँगें। फिर प्रसाद बाँटें। पहले घर के बड़े-बुज़ुर्ग प्रसाद लें, फिर बच्चे और बाकी सदस्य।
लक्ष्मी पूजा के बाद क्या करें?
पूजा खत्म होने के बाद कुछ छोटी-छोटी बातें हैं जिन्हें कई लोग भूल जाते हैं।
- दीया बुझने न दें: कोशिश करें कि मुख्य दीया पूरी रात जलता रहे। इसके लिए उसमें पर्याप्त घी या तेल पहले से भर दें।
- दरवाज़ा कुछ देर खुला रखें: पुरानी मान्यता है कि पूजा के बाद कुछ देर मुख्य दरवाज़ा खुला रखने से लक्ष्मी जी का आगमन होता है।
- पटाखों का ध्यान रखें: पूजा के तुरंत बाद पटाखे जलाना है तो सुरक्षा और प्रदूषण दोनों का ख्याल रखें। कई परिवार अब ग्रीन पटाखे या सिर्फ दीयों और फुलझड़ी तक सीमित रहते हैं।
- सिक्के और नोट: पूजा में रखे सिक्के और नोट अगले दिन तिजोरी या अलमारी में रख दें।
- मूर्ति का विसर्जन: अगले दिन या अपनी परंपरा के हिसाब से मूर्ति का रखरखाव करें।
दिवाली पूजा में क्या न करें?
कुछ गलतियाँ जाने-अनजाने हो जाती हैं, इनसे बचना बेहतर है:
- पूजा के दिन घर में झगड़ा या ऊँची आवाज़ में बहस न करें
- टूटी या खंडित मूर्ति की पूजा न करें
- गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएँ
- बासी या मुरझाए फूल पूजा में न रखें
- पूजा में काले रंग के कपड़े पहनने से बचें
- शाम के बाद घर में झाड़ू लगाने से कई घरों में परहेज़ किया जाता है, इसलिए सफाई पहले ही कर लें
- माँस, शराब और तामसिक भोजन से दूर रहें
- पूजा के बीच में बार-बार फ़ोन न देखें
लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए कुछ आसान टिप्स
1. सामान एक दिन पहले निकाल लें। पूजा के दिन सारा सामान एक थाली या ट्रे में रखकर तैयार रखें, ताकि बीच में उठना न पड़े।
2. बच्चों को शामिल करें। दीये सजाना, रंगोली बनाना या खील-बताशे रखना जैसे छोटे काम बच्चों को दें। इससे वो भी परंपरा से जुड़ते हैं।
3. घर के बड़ों से पूछें। हर परिवार में थोड़ा अलग तरीका होता है। कहीं माँ लक्ष्मी को सफेद मिठाई चढ़ती है, कहीं खीर, कहीं सिर्फ खील-बताशे। जो आपके घर की परंपरा है, वही सबसे सही है।
4. आरती की किताब या मोबाइल में पहले से तैयार रखें। अक्सर पूजा के वक्त आरती याद नहीं आती, इसलिए पहले से डाउनलोड या प्रिंट करके रख लें।
5. बजट पर न जाएँ। लक्ष्मी पूजा में दिखावे से ज़्यादा श्रद्धा मायने रखती है। एक साफ चौकी, घी का दीया, चावल, फूल और मिठाई भी काफी है।
ध्यान देने वाली ज़रूरी बातें: दिवाली लक्ष्मी-गणेश पूजा से पहले ये जान लें
- पूजा का सही समय: लक्ष्मी पूजा आमतौर पर प्रदोष काल में की जाती है, यानी सूर्यास्त के बाद का समय। इसमें स्थिर लग्न को खास शुभ माना जाता है। हर शहर का समय थोड़ा अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग ज़रूर देख लें।
- पूजा खुद घर पर भी हो सकती है: पंडित जी हों तो अच्छा है, पर ज़रूरी नहीं। ऊपर बताई विधि से कोई भी व्यक्ति घर पर आराम से पूजा कर सकता है। संकल्प भी सरल भाषा में मन की बात कहकर लिया जा सकता है।
- माँ लक्ष्मी को कौन सा फूल चढ़ाएँ: कमल का फूल माँ लक्ष्मी को सबसे प्रिय माना जाता है। कमल न मिले तो गेंदा या गुलाब भी चढ़ा सकते हैं।
- मूर्तियाँ किस तरफ रखें: परंपरा के अनुसार गणेश जी माँ लक्ष्मी के बाईं ओर रखे जाते हैं। गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती, ये बात याद रखें।
- कितने दीये जलाएँ: कोई तय संख्या नहीं है। कई लोग 5, 7, 11 या 21 दीये जलाते हैं, और कुछ लोग सजावट के लिए इससे भी ज़्यादा। ध्यान बस इतना रखें कि मुख्य दीया घी का हो और माँ लक्ष्मी के सामने रखा जाए।
- कौन सा मंत्र बोलें: सबसे आसान मंत्र है “ॐ महालक्ष्म्यै नमः”। चाहें तो “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” भी बोल सकते हैं। गणेश जी के लिए “ॐ गं गणपतये नमः” बोलें।
- सारा सामान न मिले तो परेशान न हों: रोली, चावल, फूल, दीया, मिठाई और जल से भी पूजा पूरी मानी जाती है। भाव और श्रद्धा सबसे ऊपर हैं।
- अकेले रहने वाले भी कर सकते हैं पूजा: कमरे में छोटी चौकी या साफ जगह पर मूर्ति या फोटो रखें, दीया जलाएँ और सच्चे मन से प्रार्थना करें। इतना काफी है।
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