Hanuman Chalisa Reading Time : हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय को लेकर हर घर में अलग-अलग बातें सुनने को मिलती हैं। कोई कहता है सुबह पढ़ो, कोई कहता है नहाए बिना मत छूना, और कोई शाम को दीया जलाकर बैठने की सलाह देता है। मैं ख़ुद बहुत छोटी उम्र से चालीसा पढ़ती आ रही हूँ, इसलिए इन सब बातों के बीच बड़ी हुई हूँ। इतने सालों में जो समझ आया, वह सीधी-सी बात है। हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय और नियम उतने मुश्किल नहीं हैं जितना लोग सोच लेते हैं।
हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय (Hanuman Chalisa Reading Time)
सबसे पहले यह जान लीजिए कि चालीसा कभी भी पढ़ी जा सकती है। बस आप साफ़-सुथरे हों और मन से बैठे हों, इतना काफ़ी है। फिर भी कुछ समय ऐसे हैं जब पाठ में मन ज़्यादा लगता है।
सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटा पहले का वक़्त तो ख़ास है ही, पर रोज़ इतना जल्दी उठना सबके बस में नहीं होता। नहाकर सुबह आठ-नौ बजे तक पढ़ लें, तब भी ठीक है। उस वक़्त बाहर शोर कम होता है, दिमाग़ में चिंताओं की भीड़ नहीं होती, और पाँच-सात मिनट में पूरी चालीसा हो जाती है।
शाम को सूर्यास्त के आसपास दीया जलाकर पढ़ना भी बहुत अच्छा लगता है। दिन भर की भागदौड़ के बाद थोड़ा सुकून मिल जाता है।
और रात में हनुमान चालीसा पढ़ना? बिल्कुल पढ़ सकते हैं। हनुमान जी को संकटमोचन कहते हैं, और जिनका मन रात को बेचैन रहता है, वे सोने से पहले पाठ कर लेते हैं। हाथ-पैर धोइए, शांति से बैठिए, बस।
मेरा अपना हिसाब यह है कि जब भी मन को शांति चाहिए होती है, मैं पाठ कर लेती हूँ। कोई घड़ी नहीं देखती। और सच कहूँ तो उसके बाद सुकून भी अच्छा मिलता है।
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मंगलवार और शनिवार
मंगलवार को हनुमान चालीसा पढ़ने की परंपरा सबसे पुरानी है। यह दिन हनुमान जी का माना जाता है, और बहुत लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं।
शनिवार के बारे में एक मान्यता बहुत चलती है। कहते हैं जब किसी का शनि भारी चल रहा हो, तो हनुमान जी की पूजा करने और उनका व्रत रखने से काफ़ी राहत मिलती है। जो लोग व्रत रखकर चालीसा का पाठ करते हैं, उनके लिए इसे बहुत फलदायी बताया जाता है। यह आस्था की बात है, इसलिए जिसका मन माने वह करे। पर इतना ज़रूर है कि बहुत से लोग इस दिन पूरे भाव से बैठते हैं, और भाव ही असली चीज़ है।
हनुमान जयंती, रामनवमी और नवरात्रि में भी पाठ का अलग ही महत्व माना जाता है।
हनुमान चालीसा पढ़ने के नियम
नियम सुनकर डरिए मत। ज़्यादातर वही बातें हैं जो आप किसी भी पूजा में करते हैं।
साफ़-सुथरे रहें। नहा सकें तो अच्छा, नहीं तो हाथ-मुँह धोकर साफ़ कपड़े पहन लें। बैठने के लिए कोई साफ़ आसन या चादर ले लें। लाल आसन शुभ माना जाता है, पर न मिले तो अटकिए मत। मुँह पूर्व या उत्तर की तरफ़ हो तो अच्छा है, लेकिन छोटे घर में जगह न हो तो जहाँ बैठ सकें वहीं बैठिए।
दीया या अगरबत्ती ज़रूरी नहीं है, फिर भी इनसे माहौल बन जाता है। फ़ोन को silent पर डाल दें, क्योंकि पाठ के बीच नोटिफ़िकेशन देखने लगना सबसे आम गड़बड़ी है।
उच्चारण का थोड़ा ध्यान रखिए। चालीसा अवधी में है, तो कुछ शब्द पहली बार अटपटे लगते हैं। किसी से सुन लीजिए या अच्छी किताब से मिला लीजिए। थोड़ी-बहुत चूक पर घबराने की ज़रूरत नहीं।
मंगलवार का व्रत रखते हैं तो उस दिन लहसुन-प्याज़ और माँसाहार से दूर रहने की परंपरा है। बाक़ी दिनों में कोशिश यही रहे कि पाठ के वक़्त मन शांत रहे।
हमारे घर में छोटे-बड़े सब पाठ करते हैं। बच्चे भी, और दादी-नाना की उम्र वाले भी। किसी को नियमों की लंबी सूची नहीं रटवाई गई। बस साफ़ होकर, मन से बैठना सिखाया गया।
महावारी के दिनों में हनुमान चालीसा
यह सवाल बहुत पूछा जाता है, और जवाब हर जगह अलग है। मैं जहाँ से हूँ, वहाँ इस बात का कोई भेद नहीं माना जाता। महावारी के दौरान पाठ नहीं करना चाहिए, ऐसा कोई नहीं कहता और इस चीज़ से कोई परहेज़ नहीं किया जाता।
मेरी राय यह है कि जिसे पाठ करना हो, वह करे, जैसे उसे सही लगे। अगर आपको लगता है कि आपको पाठ की ज़रूरत है और उससे सुकून मिलता है, तो ज़रूर पढ़िए। और अगर आपके अपने मन से आ रहा है कि इन दिनों नहीं पढ़ना, तो रहने दीजिए। अपनी इच्छा से चलिए। हर परिवार की परंपरा अलग होती है, तो अपने घर की मान्यता और अपनी सहजता को देखकर तय कर लें।
हनुमान चालीसा पढ़ने की विधि: चरण-दर-चरण
पहली बार शुरू कर रहे हैं तो ऐसे कर सकते हैं। पहले अपना एक समय तय कर लीजिए, सुबह या शाम, और रोज़ उसी पर टिकने की कोशिश कीजिए। फिर नहाकर साफ़ कपड़े पहनिए और हनुमान जी या श्रीराम की तस्वीर के सामने आसन बिछा लीजिए। दीया-अगरबत्ती जलाइए, हो सके तो थोड़ा जल, फूल और प्रसाद रख लीजिए।
अब आँखें बंद करके एक-दो मिनट बस शांत बैठिए। पहले गणेश जी और श्रीराम को याद कीजिए, फिर दोहे से शुरू करके पूरी चालीसा पढ़िए, न बहुत तेज़ और न बहुत धीमे। आख़िर में आरती कर लीजिए और जो मन में हो, चुपचाप कह दीजिए। प्रसाद ख़ुद भी लीजिए और घर में सबको बाँटिए।
कितनी बार पढ़ें? रोज़ एक बार काफ़ी है। कुछ लोग मंगलवार को तीन, सात या ग्यारह बार पढ़ते हैं, और मनोकामना के लिए इक्कीस या इक्यावन दिन का संकल्प भी लेते हैं। एक सलाह है कि उतना ही संकल्प लीजिए जितना सच में निभा सकें। बीच में छूट गया तो मन पर बोझ बन जाता है।
हनुमान चालीसा पाठ के फायदे
फ़ायदे हर किसी के अलग होते हैं, पर मैं अपनी बता सकती हूँ। जब भी मन बेचैन होता है और शांति चाहिए होती है, पाठ करने के बाद काफ़ी सुकून मिलता है। यह मेरे लिए ध्यान जैसा है। मेरा मानना है कि यह सब हमारे अवचेतन मन की बात है। हम अपने मन में जो बिठा लेते हैं, असर भी वैसा ही होता है। अगर मैं पहले से मानकर बैठी हूँ कि पाठ से मुझे सुकून मिलेगा, तो सच में मिलता है। और अगर कोई यही सोचकर बैठे कि इससे कुछ नहीं होने वाला, तो शायद उसे कुछ महसूस भी न हो। इसीलिए मैं इसे सिर्फ़ किताब की तरह नहीं पढ़ती। मेरे लिए यह भरोसे और भावना की चीज़ है। हमारे घर में दादी हमेशा कहती थीं कि मन न लगे तो एक बार ही पढ़ो, पर मन से पढ़ो।
कुछ आम सवाल, जो अक्सर पूछे जाते हैं FAQ
क्या हनुमान चालीसा बिना नहाए पढ़ सकते हैं?
क्या महिलाएँ मासिक धर्म के दिनों में हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?
क्या चालीसा सुनने से भी वही लाभ मिलता है?
क्या चालीसा याद होना ज़रूरी है?
घर में हनुमान चालीसा किस जगह पढ़नी चाहिए?
क्या बच्चे भी हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?
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