Dhanteras Par Kya Kharide: दिवाली से दो दिन पहले बाज़ारों में अलग ही रौनक होती है। सराफा की दुकानों पर भीड़, बर्तन वालों की गली में मोलभाव, और हर घर में एक ही बातचीत कि इस बार धनतेरस पर क्या लें। कोई सोने की सोचता है, कोई चाँदी का सिक्का, और जिनका बजट कम है वो पूछते हैं कि क्या झाड़ू या धनिया से भी काम चल जाएगा। इस लेख में आपको धनतेरस पर क्या खरीदें, इसके पीछे की परंपरा, हर बजट के विकल्प, क्या नहीं खरीदना चाहिए और खरीदारी के समय ज़रूरी सावधानियाँ आसान भाषा में मिल जाएँगी।
धनतेरस क्या है और इस दिन खरीदारी क्यों होती है?
धनतेरस कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, यानी दिवाली से दो दिन पहले। इस दिन तीन की पूजा मुख्य रूप से होती है: भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी और कुबेर देव।
धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है। कथा के अनुसार समुद्र मंथन में वो अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसीलिए इस दिन को स्वास्थ्य और धन, दोनों से जोड़ा जाता है। पुरानी कहावत भी है कि पहला सुख निरोगी काया, और धनतेरस इसी बात की याद दिलाता है।
खरीदारी की परंपरा इस मान्यता से जुड़ी है कि धनतेरस पर लाई गई नई चीज़ घर में समृद्धि और बरकत लाती है। मान्यता ये भी है कि इस दिन जो चीज़ खरीदी जाती है, उसमें तेरह गुना वृद्धि होती है। इसी भरोसे के साथ लोग सोना, चाँदी, बर्तन और अब गाड़ी, फ़ोन और गैजेट तक इसी दिन लेते हैं।
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त कैसे देखें?
कई बार लोग सिर्फ तारीख देखकर निकल पड़ते हैं, फिर पता चलता है कि त्रयोदशी तिथि दो दिन में बँटी हुई थी और confusion हो गया।
- खरीदारी और पूजा के मुहूर्त अलग-अलग होते हैं। पंचांग में दोनों का समय बताया जाता है।
- पूजा आमतौर पर प्रदोष काल में होती है, यानी सूर्यास्त के बाद का समय।
- खरीदारी के लिए पंचांग में बताए गए चौघड़िया या शुभ समय को देखा जाता है।
- हर शहर का सूर्यास्त अलग होता है, इसलिए समय में थोड़ा फर्क आ सकता है।
- अपने शहर का पंचांग या घर के पंडित जी की सलाह सबसे भरोसेमंद रहती है।
अगर किसी वजह से मुहूर्त में खरीदारी न हो पाए, तो परेशान न हों। त्रयोदशी तिथि के दौरान खरीदी गई चीज़ को भी शुभ माना जाता है। कई लोग एक दिन पहले ही सामान पसंद करके दुकान में रखवा देते हैं और धनतेरस के दिन घर लाते हैं।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
सोना और चाँदी
सबसे पुरानी और सबसे आम परंपरा यही है। सोने को माँ लक्ष्मी का रूप माना जाता है, और चाँदी को चंद्रमा से जोड़ा जाता है, जो मन की शांति देता है। जिनके पास बजट है वो गहने, सिक्का या बिस्किट लेते हैं।
अगर बजट कम है तो ज़रूरी नहीं कि भारी चीज़ ही खरीदें। एक छोटा चाँदी का सिक्का, जिस पर लक्ष्मी-गणेश बने हों, पूजा के लिए बिल्कुल ठीक माना जाता है। कई घरों में हर साल एक छोटा सिक्का खरीदने का नियम है, जो धीरे-धीरे जमा होता जाता है।
पीतल, ताँबे और स्टील के बर्तन
धन्वंतरि जी अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे, इसलिए बर्तन खरीदना बहुत पुरानी परंपरा है। आमतौर पर ये चीज़ें ली जाती हैं:
- पीतल या ताँबे का लोटा, गिलास या कलश
- पूजा की थाली और दीपक
- स्टील के बर्तन, जैसे थाली, कटोरी, कुकर
- नया कलश, जिसका इस्तेमाल दिवाली की पूजा में हो सके
कई घरों में नया बर्तन ज़रूर लिया जाता है, चाहे छोटा सा ही क्यों न हो। इसमें रसोई का काम भी चल जाता है और परंपरा भी निभ जाती है।
नई झाड़ू
झाड़ू को माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि पुरानी झाड़ू हटाकर नई लाना घर से दरिद्रता को बाहर करता है। ये सबसे सस्ता और सबसे आसान विकल्प है। नई झाड़ू को घर में ऐसी जगह रखें जो आसानी से नज़र न आए, और उस पर पैर न लगे, इसका ध्यान रखें।
साबुत धनिया
धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने की परंपरा खास तौर पर उत्तर भारत में है। लोग इसे पूजा में माँ लक्ष्मी को चढ़ाते हैं और बाद में थोड़े बीज घर की तिजोरी या अलमारी में रख देते हैं। कुछ लोग इन्हें बगीचे या गमले में बो भी देते हैं, ये मानकर कि इससे घर में हरियाली और समृद्धि बनी रहेगी। ये बहुत सस्ता है और हर किसी की पहुँच में है।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या सिक्का
दिवाली की पूजा के लिए नई मूर्ति धनतेरस पर ही ले आने का चलन है। मिट्टी की मूर्ति पारंपरिक रूप से सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा चाँदी या पीतल की छोटी मूर्ति भी लोग लेते हैं, जो हर साल पूजा में इस्तेमाल हो सके।
कौड़ी, गोमती चक्र और कमलगट्टा
ये छोटी चीज़ें माँ लक्ष्मी को प्रिय मानी जाती हैं। कई घरों में पूजा के बाद इन्हें लाल कपड़े में बाँधकर तिजोरी या अलमारी में रख दिया जाता है। बाज़ार में ये कुछ रुपये में मिल जाती हैं।
दीये और पूजा का सामान
मिट्टी के नए दीये खरीदना सबसे सरल परंपरा है। इसमें कुम्हारों की भी मदद हो जाती है। इसके साथ रोली, कलावा, धूप, कपूर और बाकी पूजा सामग्री भी एक बार में ले आएँ।
वाहन, घर का सामान और गैजेट
आजकल धनतेरस पर गाड़ी, बाइक, फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन, मोबाइल और लैपटॉप जैसी चीज़ें भी खूब खरीदी जाती हैं। कई लोग नए घर या दुकान के लिए प्रॉपर्टी की बुकिंग भी इसी दिन करते हैं। पुरानी परंपरा में तो ये चीज़ें नहीं थीं, पर अब इन्हें भी शुभ माना जाने लगा है। अगर आप कोई बड़ी चीज़ वैसे भी लेने वाले थे, तो उसे धनतेरस तक रोकना ठीक है, बशर्ते आप ऑफर या बजट के चक्कर में ज़रूरत से ज़्यादा खर्च न करें।
किताबें और कलम
व्यापारी वर्ग नई बही-खाता, कलम और रजिस्टर इसी समय लाते हैं। विद्यार्थी चाहें तो किताब या कोई ज़रूरी पुस्तक भी ले सकते हैं।
बजट के हिसाब से धनतेरस खरीदारी के विकल्प
हर किसी की जेब एक जैसी नहीं होती, और परंपरा का मतलब ये नहीं कि महँगी चीज़ ही ली जाए। मोटा-मोटा बजट के हिसाब से ऐसे सोच सकते हैं।
कम बजट में:
- नई झाड़ू
- साबुत धनिया
- मिट्टी के दीये
- कौड़ी या गोमती चक्र
- छोटा पीतल का दीपक या कटोरी
मध्यम बजट में:
- चाँदी का सिक्का या छोटी मूर्ति
- पीतल, ताँबे या स्टील के बर्तन
- पूजा की थाली का सेट
- घर के लिए कोई ज़रूरी छोटा सामान
ज़्यादा बजट में:
- सोने के गहने, सिक्का या बिस्किट
- गाड़ी, इलेक्ट्रॉनिक सामान या फर्नीचर
- प्रॉपर्टी या दुकान की बुकिंग
याद रखें कि श्रद्धा से लाई गई छोटी चीज़ भी शुभ मानी जाती है। कर्ज़ लेकर या बजट बिगाड़कर खरीदारी करना ठीक नहीं है।
धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?
कुछ चीज़ों को लेकर कई घरों में परहेज़ किया जाता है। ये मान्यताएँ हर परिवार और क्षेत्र में अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने घर के बड़ों से ज़रूर पूछ लें।
- लोहे की चीज़ें और काला सामान: कई जगह माना जाता है कि लोहे या काले रंग की चीज़ें इस दिन नहीं खरीदनी चाहिए।
- काँच का सामान: काँच की चीज़ें, जैसे काँच के बर्तन या सजावटी सामान, कई घरों में इस दिन नहीं लिए जाते।
- चाकू, कैंची और नुकीली चीज़ें: इन्हें अशुभ माना जाता है।
- एल्यूमिनियम या प्लास्टिक के बर्तन: परंपरा में इन्हें शुभ नहीं गिना जाता, इसलिए बर्तन लेना हो तो पीतल, ताँबा या स्टील चुनें।
- तेल और घी: कुछ जगहों पर इस दिन तेल या घी खरीदने से परहेज़ की मान्यता है।
- उधार लेकर खरीदारी: परंपरा कहती है कि इस दिन उधार चुकाना अच्छा है, लेकिन नया कर्ज़ लेकर खरीदारी करना ठीक नहीं।
धनतेरस की पूजा कैसे करें?
खरीदारी के बाद शाम को पूजा का समय आता है। विधि सरल है।
- प्रदोष काल में पूजा की जगह साफ करें और चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
- भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी और कुबेर की तस्वीर या मूर्ति रखें।
- आज खरीदे हुए सिक्के, बर्तन या सोने-चाँदी की चीज़ को चौकी पर रखें।
- रोली, चावल, फूल और दीप से पूजा करें।
- धन्वंतरि जी को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएँ, और माँ लक्ष्मी को खील-बताशे व मिठाई चढ़ाएँ।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय नमः” या सरल रूप में “ॐ धन्वंतरये नमः” का जाप करें।
- अंत में आरती करें और परिवार में प्रसाद बाँटें।
पूजा के बाद साबुत धनिया और खरीदी हुई चीज़ें तिजोरी या पूजा स्थान पर रख दें।
यम दीपम: धनतेरस की शाम का एक खास दीया
धनतेरस की शाम को घर के बाहर एक दीया जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपम कहते हैं। इसे यमराज के नाम से जलाया जाता है।
इसके पीछे एक पुरानी कथा है। राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन साँप के काटने से उसकी मृत्यु होगी। उसकी पत्नी ने उस रात घर के दरवाज़े पर सोने-चाँदी के गहने और ढेर सारे दीये रख दिए और पूरी रात कहानियाँ-गीत सुनाकर पति को जगाए रखा। यमराज साँप के रूप में आए, पर चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं और वो लौट गए। तब से अकाल मृत्यु के भय से बचने के लिए ये दीया जलाया जाता है।
यम दीपम कैसे जलाएँ:
- शाम को प्रदोष काल में, सूर्यास्त के बाद जलाएँ
- आटे का चौमुखा दीया बनाएँ, यानी चार मुँह वाला
- उसमें सरसों का तेल डालें और चार बत्तियाँ लगाएँ
- घर के मुख्य द्वार या बाहर की चौखट पर रखें, मुँह दक्षिण दिशा की ओर रखें
- दीया रखते समय मन में परिवार की सुरक्षा और लंबी उम्र की प्रार्थना करें
सोना खरीदते समय क्या सावधानी रखें?
धनतेरस पर सोने की माँग बहुत बढ़ जाती है, और इसी वजह से ठगी की संभावना भी बढ़ती है। कुछ बातें ज़रूर ध्यान रखें।
- हॉलमार्क ज़रूर देखें: भारत में सोने के गहनों पर BIS हॉलमार्क और HUID (छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड) होना चाहिए। ये असली और शुद्ध होने का सबूत है।
- बिल लेना न भूलें: बिल पर वज़न, शुद्धता (कैरेट), मेकिंग चार्ज और रेट साफ लिखे होने चाहिए।
- मेकिंग चार्ज की तुलना करें: अलग-अलग दुकानों में मेकिंग चार्ज अलग होता है। दो-तीन जगह पूछकर तुलना कर लें।
- सिक्के और बिस्किट में कम मेकिंग चार्ज: अगर आपका मकसद सिर्फ निवेश या शुभ के लिए खरीदना है, तो गहनों की जगह सिक्का या बिस्किट सस्ता पड़ सकता है।
- पुराना सोना बदलते समय सावधान रहें: पुराना सोना बदलवाते वक्त उसकी शुद्धता की जाँच खुद सामने करवाएँ और कटौती की शर्तें पहले पूछ लें।
- भरोसेमंद दुकान चुनें: जिस दुकान से आप या आपके जान-पहचान वाले पहले खरीद चुके हैं, वहाँ से खरीदना ज़्यादा सुरक्षित रहता है।
क्या डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF भी धनतेरस पर लिया जा सकता है?
आजकल कई लोग असली सोने की जगह डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड भी खरीदते हैं। इनमें लॉकर या चोरी का डर नहीं रहता और कम रकम से भी शुरुआत हो सकती है।
पर ध्यान रखें, इनकी अपनी शर्तें, चार्ज और जोखिम होते हैं। निवेश के रूप में कुछ भी खरीदने से पहले उसके नियम, शुल्क और टैक्स पूरी तरह समझ लें। मैं कोई वित्तीय सलाहकार नहीं हूँ, इसलिए बड़ी रकम लगाने से पहले किसी भरोसेमंद सलाहकार से बात ज़रूर करें। और अगर आपका मकसद पूजा में रखने के लिए कुछ लेना है, तो असली सिक्का या चीज़ घर लाना परंपरा के हिसाब से ज़्यादा सही माना जाता है।
धनतेरस खरीदारी की तैयारी के आसान टिप्स
1. पहले से लिस्ट बना लें। बाज़ार जाकर सोचने से अक्सर बजट बिगड़ जाता है। घर पर बैठकर तय कर लें कि क्या-क्या लेना है और कितना खर्च करना है।
2. भीड़ से बचें। धनतेरस के दिन दोपहर और शाम को बाज़ार में बहुत भीड़ होती है। हो सके तो सुबह जल्दी या एक दिन पहले जाकर खरीदारी कर लें।
3. ऑनलाइन खरीदारी में सावधानी। ऑनलाइन ऑफर देखकर जल्दबाज़ी न करें। विक्रेता की रेटिंग, रिटर्न पॉलिसी और डिलीवरी का समय पहले देख लें, ताकि धनतेरस के दिन सामान समय पर पहुँचे।
4. नकद और ऑनलाइन भुगतान का हिसाब रखें। बड़ी खरीदारी में पक्का बिल और ऑनलाइन भुगतान की रसीद संभालकर रखें।
5. घर के बड़ों से राय लें। कहीं बर्तन ज़रूरी है, कहीं सिर्फ धनिया और झाड़ू काफी है। जो आपके घर की रीत है, वही सबसे सही है।
6. बच्चों को साथ ले जाएँ। दीये या छोटी चीज़ें चुनने का काम बच्चों को दें, इससे वो त्योहार और परंपरा से जुड़ते हैं।
7. नई चीज़ घर लाने के बाद पूजा में रखें। खरीदी गई चीज़ को सीधे अलमारी में न रखें। पहले पूजा स्थान पर रखकर रोली-चावल से तिलक करें, फिर अपनी जगह पर रखें।
ध्यान देने वाली ज़रूरी बातें: धनतेरस पर खरीदारी से पहले ये जान लें
- खरीदारी का सही समय: पंचांग में बताए शुभ मुहूर्त या चौघड़िया में खरीदारी करें। त्रयोदशी तिथि कभी-कभी दो दिन में बँट जाती है, इसलिए तारीख और समय अपने शहर के पंचांग से मिला लें।
- बजट से बाहर न जाएँ: परंपरा श्रद्धा की है, दिखावे की नहीं। झाड़ू, धनिया, दीये या छोटा सिक्का भी पूरी तरह शुभ माने जाते हैं। कर्ज़ लेकर खरीदारी करना ठीक नहीं।
- सोना लेते समय हॉलमार्क और बिल पक्का करें: HUID वाला हॉलमार्क देखें, बिल पर शुद्धता, वज़न और मेकिंग चार्ज साफ लिखवाएँ।
- लोहा, काँच, नुकीली चीज़ों से बचें: कई घरों में इन्हें इस दिन खरीदना अशुभ माना जाता है। अगर कोई ज़रूरी चीज़ लेनी ही है तो उसे धनतेरस से एक दिन पहले या बाद में लें।
- बर्तन लें तो धातु देखकर चुनें: पीतल, ताँबा और स्टील के बर्तन ज़्यादा शुभ माने जाते हैं। एल्यूमिनियम या प्लास्टिक से परहेज़ करें।
- यम दीपम ज़रूर जलाएँ: शाम को घर के बाहर चौमुखा दीया दक्षिण दिशा में रखना न भूलें। ये धनतेरस की शाम की ज़रूरी परंपरा है।
- नई चीज़ पर पूजा ज़रूर करें: खरीदी हुई चीज़ को पहले पूजा में रखें, फिर इस्तेमाल करें। चाहे सिक्का हो या नया मोबाइल, रोली-चावल से तिलक करना शुभ माना जाता है।
- ठगी से सावधान रहें: बहुत सस्ते सोने या “सिर्फ आज का ऑफर” जैसे दावों पर आँख बंद करके भरोसा न करें। भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें।
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