Durga Puja 2027 Date: दुर्गा पूजा 2027 मंगलवार, 5 अक्टूबर को महा षष्ठी से शुरू होगी और 9 या 10 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ खत्म होगी। अंतिम तारीख इस पर निर्भर करती है कि आप बंगाल में हैं या देश के किसी और हिस्से में। नवमी और दशमी की गिनती में एक दिन का अंतर है। इस लेख में षष्ठी से दशमी तक हर दिन की तारीख और पूजा की जानकारी है।
2027 में दुर्गा पूजा की तारीखें
पश्चिम बंगाल में महा षष्ठी 5 अक्टूबर को है, महा सप्तमी 6 अक्टूबर को, महा अष्टमी 7 अक्टूबर को, महा नवमी 9 अक्टूबर को और बिजोया दशमी 10 अक्टूबर को। देश के बाकी हिस्सों में गिनती थोड़ी अलग है। वहां दुर्गा अष्टमी 7 अक्टूबर को, महा नवमी 8 अक्टूबर को और दशहरा यानी विजयादशमी 9 अक्टूबर को पड़ रही है।
पांचों दिन एक नज़र में:
- षष्ठी: मंगलवार, 5 अक्टूबर
- सप्तमी: बुधवार, 6 अक्टूबर
- अष्टमी: गुरुवार, 7 अक्टूबर
- नवमी: शुक्रवार, 8 अक्टूबर (देश के ज्यादातर पंचांग) और शनिवार, 9 अक्टूबर (बंगाल)
- दशमी: शनिवार, 9 अक्टूबर (ज्यादातर पंचांग) और रविवार, 10 अक्टूबर (बंगाल)
अगर आप कोलकाता, गुवाहाटी, भुवनेश्वर या अगरतला जैसी जगहों के पंडाल देखने जा रहे हैं, तो वहां की तारीखें ही आपके काम आएंगी। बाकी शहरों में अक्सर नवमी 8 अक्टूबर और दशहरा 9 अक्टूबर को माना जाएगा।
तारीखों में एक दिन का फर्क क्यों आता है
दुर्गा पूजा तिथि के हिसाब से चलती है, तारीख के हिसाब से नहीं। तिथि दिन के बीच में भी बदल सकती है, और किस दिन कौन-सी पूजा होगी, यह सूर्योदय के समय की स्थिति और शहर पर निर्भर करता है। बंगाल की परंपरा में नवमी और दशमी की गिनती बाकी देश से एक दिन आगे रखी जाती है। इसलिए अपने शहर में अलग तारीख दिखे, तो इसे गलती न समझें।
पूजा का सटीक समय जानने के लिए अपने शहर का पंचांग देखना सबसे सुरक्षित है। संधि पूजा और विजयादशमी के मुहूर्त जैसी चीजें हर शहर में कुछ मिनट या घंटे आगे-पीछे हो जाती हैं।
महालया: पूजा की शुरुआत
दुर्गा पूजा का माहौल महालया से बनने लगता है। शास्त्रों के अनुसार चंडी पाठ सहित दुर्गा पूजा महालया अमावस्या के अगले दिन से शुरू होनी चाहिए। इस दिन पितृ पक्ष खत्म होता है और देवी पक्ष शुरू होता है। सुबह जल्दी उठकर चंडी पाठ सुनने और पितरों को तर्पण देने की परंपरा है। बंगाल में बहुत से परिवार इस दिन रेडियो या टीवी पर चंडी पाठ सुनते हैं।
2027 के महालया की तारीख 29 या 30 सितंबर बताई जा रही है। अमावस्या तिथि इन दोनों दिनों में फैली है, इसलिए मैं एक तारीख पक्की नहीं कर पाया। अपने शहर के पंचांग से इसे मिला लीजिए।
महा षष्ठी: देवी का आगमन
षष्ठी से पंडालों में मुख्य पूजा शुरू होती है। इस दिन कल्पारंभ, बोधन, आमंत्रण और अधिवास जैसी रस्में होती हैं। बोधन का मतलब है देवी को जगाना और पंडाल में बुलाना। माना जाता है कि देवी को असमय जगाया जाता है, इसीलिए बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा में इस पूजा को अकालबोधन भी कहते हैं।
षष्ठी की शाम तक ज्यादातर पंडालों में मूर्ति का आवरण हटा दिया जाता है। लोग नए कपड़े पहनकर पहली बार पंडाल देखने निकलते हैं, इसलिए यहीं से घूमने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
महा सप्तमी: मुख्य पूजा का दिन
सप्तमी से बड़ी पूजा शुरू होती है। प्राण प्रतिष्ठा केवल सप्तमी को एक बार की जाती है, और अष्टमी की पूजा में यह दोहराई नहीं जाती। कई जगह इस दिन सुबह नवपत्रिका को स्नान कराया जाता है। नवपत्रिका नौ तरह के पौधों का समूह होता है, जिसे देवी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सप्तमी से देवी ने महिषासुर के साथ युद्ध शुरू किया था। यह युद्ध दशमी तक चला।
2027 में सप्तमी 6 अक्टूबर को है। पश्चिम बंगाल में यह क्षेत्रीय अवकाश भी है।
महा अष्टमी: सबसे खास दिन
पूरी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन अष्टमी माना जाता है। इस दिन महास्नान और षोडशोपचार पूजा होती है, नौ छोटे कलश रखकर दुर्गा के नौ रूपों का आह्वान किया जाता है, और कुमारी पूजा भी की जाती है। कुमारी पूजा में छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है। अष्टमी पर देवी के अस्त्र-शस्त्रों की भी पूजा होती है।
अष्टमी का सबसे चर्चित अनुष्ठान संधि पूजा है। अष्टमी के आखिरी 24 मिनट और नवमी के पहले 24 मिनट का समय संधि काल कहलाता है, और इसे पूरी पूजा का सबसे शुभ समय माना जाता है। संधि काल का सटीक समय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए मैं कोई एक समय नहीं बता रहा। पंडाल की समिति आमतौर पर अपना कार्यक्रम पहले से बता देती है। उसी को देखकर जाना ठीक रहेगा।
अष्टमी की सुबह अंजलि देने के लिए पंडालों में भारी भीड़ रहती है। अगर आप अंजलि में शामिल होना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है।
महा नवमी: विजय का दिन
नवमी को देवी की महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा होती है। मान्यता है कि इसी दिन देवी ने महिषासुर को हराया था। कई जगह नवमी पर होम किया जाता है। पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, बिहार, झारखंड और त्रिपुरा में यह दिन बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
दक्षिण भारत में नवमी को अक्सर आयुध पूजा के रूप में मनाते हैं। लोग अपने औजारों, वाहनों और किताबों की पूजा करते हैं। इसलिए एक ही तारीख देश के अलग हिस्सों में अलग तरह से मनाई जाती है।
विजयादशमी: विसर्जन और दशहरा
दसवें दिन दुर्गा पूजा खत्म होती है। पंडालों में देवी को विदाई दी जाती है, और बंगाल में विवाहित महिलाएं सिंदूर खेला खेलती हैं। इसके बाद मूर्तियों का विसर्जन होता है। उत्तर और मध्य भारत में इसी दिन रामलीला के बाद रावण दहन होता है।
दिल्ली के लिए दशमी तिथि 9 अक्टूबर को सुबह 9:01 बजे शुरू होती है और 10 अक्टूबर को सुबह 11:40 बजे खत्म होती है। 9 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 2:05 से 2:52 बजे तक रहेगा। बंगाल में बिजोया दशमी 10 अक्टूबर को होगी। विजयादशमी की सही तारीख और समय हर जगह एक जैसे नहीं होंगे। अपने शहर के हिसाब से देख लेना ठीक रहेगा।
दुर्गा पूजा क्यों मनाई जाती है
देवी महात्म्य जैसे ग्रंथों में बताया गया है कि महिषासुर नाम के असुर को ऐसा वरदान मिला था कि कोई देवता या पुरुष उसे हरा नहीं सकता। उसके अत्याचार से परेशान देवताओं ने अपनी शक्तियां मिलाकर एक देवी को प्रकट किया। यही देवी दुर्गा हैं, जो शेर पर सवार हैं और दस भुजाओं में अलग-अलग अस्त्र लिए हुए हैं। उन्होंने महिषासुर को मारा। यह कथा बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में याद की जाती है।
विद्वान मानते हैं कि दुर्गा पूजा की शुरुआत ठीक-ठीक कब हुई, इसका पक्का रिकॉर्ड नहीं मिलता। देवी की कथा वाले ग्रंथ की रचना का समय लगभग 400 से 600 ईस्वी के बीच माना जाता है।
दुर्गा पूजा, नवरात्रि और दशहरा का फर्क
तीनों शब्द अक्सर एक साथ बोले जाते हैं, इसलिए यह फर्क समझ लेना काम आएगा। शारदीय नवरात्रि नौ दिन का व्रत और पूजा का पर्व है। इस बार यह 30 सितंबर से शुरू मानी जा रही है। दुर्गा पूजा आमतौर पर षष्ठी से दशमी तक के पांच दिन में बड़े पैमाने पर मनाई जाती है, खासकर पूर्वी भारत में। दशहरा नवरात्रि के बाद का दिन है, जिसमें कई जगह रावण दहन होता है। बंगाल और बाकी जगहों पर इसी दिन देवी की विदाई भी होती है।
कहां कैसे मनाई जाती है
कोलकाता सबसे बड़े उत्सव के लिए जाना जाता है, जहां थीम पर बने पंडाल और कलात्मक मूर्तियां देखने हजारों लोग आते हैं। असम, ओडिशा और त्रिपुरा में भी बड़े पैमाने पर पूजा होती है। बिहार और झारखंड में सामुदायिक पंडाल लगते हैं। दिल्ली, मुंबई और कई दूसरे शहरों में बंगाली समितियां पंडाल सजाती हैं, जहां लोग भोग और सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए जुटते हैं।
घूमने की योजना कैसे बनाएं
अगर आप दुर्गा पूजा के दौरान किसी बड़े शहर के पंडाल देखना चाहते हैं, तो कुछ बातें पहले से सोच लेना ठीक रहेगा।
सप्तमी, अष्टमी और नवमी की शाम सबसे ज्यादा भीड़ वाली होती है। भीड़ से बचना हो, तो षष्ठी की शाम या दशमी से पहले की दोपहर का समय चुन सकते हैं। ट्रेन और होटल की बुकिंग आमतौर पर काफी पहले भर जाती है, इसलिए यात्रा की तारीख तय होते ही टिकट देख लें।
सरकारी छुट्टियां राज्य के हिसाब से अलग होती हैं। 2027 की सभी राज्यों की छुट्टियों की सूची मैं पक्के तौर पर नहीं बता पा रहा। राज्य सरकार की अवकाश सूची जारी होने पर उसे जरूर देख लें।
किन बातों की पुष्टि जरूरी है
महालया की तारीख 29 या 30 सितंबर के बीच बदल सकती है, और संधि पूजा तथा विजयादशमी के सटीक मुहूर्त शहर के हिसाब से अलग होंगे। सभी राज्यों की सरकारी छुट्टियों की पूरी सूची भी अभी उपलब्ध नहीं है। इन तीनों के लिए अपने शहर के पंचांग या राज्य सरकार की अधिसूचना को आखिरी मानिए।
Durga Puja 2027 से जुड़े FAQ
दुर्गा पूजा 2027 कब से शुरू है?
दुर्गा अष्टमी 2027 कब है?
दशहरा 2027 कब है?
बंगाल और बाकी भारत में नवमी की तारीख अलग क्यों है?
दुर्गा पूजा कितने दिन चलती है?
यह भी देखें : Hanuman Chalisa Reading Time: हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय और नियम




















