chhath puja 2026 date october| chhath mahaparv 2026: छठ पूजा 2026 भले ही इस चार दिवसीय महा पर्व की उत्पत्ति बिहार की धरती से हुई हो, लेकिन आज इसने सीमाओं को लांघकर एक वैश्विक त्योहार का रूप ले लिया है. छठ पर्व केवल एक कठिन व्रत नहीं है, बल्कि यह सहजता और अपार आस्था का प्रतीक है.
यह मन की शुद्धता, समर्पण और आत्म-अनुशासन से ईश्वर (सूर्य देव और छठी मैया) की आराधना है.
हर बिहारी को रहता है छठ का इंतज़ार(chhath mahaparv 2026)
छठ ऐसा पर्व है, जिसका इंतजार हर बिहारी पूरे साल करता है.देश या विदेश, लोग जहाँ भी हों छठ आते ही अपने गाँव-घर लौटने की कोशिश करते हैं.घाटों की सफाई, घरों की पवित्रता और हर ओर भक्ति का वातावरण इस पर्व को खास बना देता है.इसी वजह से छठ को बिहार की पहचान और आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है.
2026 में छठ महापर्व है इस दिन (2026 mein chhath kab hai)
छठ महापर्व मुख्य रूप से 15 नवंबर (रविवार) को मनाया जाएगा.
मुख्य अर्घ्य का समय (दिल्ली के समय के अनुसार):
- संध्या अर्घ्य (15 नवंबर): सूर्यास्त का समय लगभग 05:28 PM
- उषा अर्घ्य (16 नवंबर): सूर्योदय का समय लगभग 06:44 AM
क्या है छठ महापर्व? (Kya Hai Chhath MahaParv)
छठ महापर्व चार दिनों का सामूहिक त्योहार है, जिसमें व्रत करने वाले के साथ-साथ पूरे परिवार की भागीदारी होती है. इस पर्व में भगवान सूर्य की पूजा सुख, समृद्धि और संतान के उत्तम स्वास्थ्य के लिए की जाती है. चूंकि यह षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, इसलिए इसे छठी मैया (देवी का छठा स्वरूप) की पूजा से जोड़ा जाता है.
छठी मइया को बच्चों की रक्षक देवी माना जाता है. इसलिए बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी देवी की पूजा की जाती है ताकि वह बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु का आशीर्वाद दें.
छठी मइया को “कात्यायनी” के नाम से भी जाना जाता है, जिनकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है. मां कात्यायनी भी बच्चों की रक्षा करती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.
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