छठ पूजा न केवल एक त्योहार है, बल्कि आस्था, सफाई और अनुशासन का बहुत बड़ा पर्व है। इसमें डूबते और उगते सूरज की पूजा की जाती है और छठी मैया से परिवार की सुख-शांति मांगी जाती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि छठ पूजा क्या है, छठ पूजा कैसे करें और छठ पूजा के प्रसाद में कौन-कौन सी सामग्री (Ingredients) लगती है, तो यह लेख आपके लिए है। यहाँ सब कुछ आसान भाषा में, एक-एक करके बताया गया है।
छठ पूजा क्या है?
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक प्राचीन हिंदू पर्व है। यह कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, यानी दिवाली के लगभग छह दिन बाद। इसी “षष्ठी” से इसका नाम “छठ” पड़ा।
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह पर्व सबसे बड़े उत्सव जैसा होता है। अब तो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और विदेशों में बसे लोग भी पूरे मन से छठ पूजा करते हैं। मान्यता है कि सूर्य देव को अर्घ्य देने से सेहत, धन और संतान का सुख मिलता है, और छठी मैया बच्चों की रक्षा करती हैं।
इस पूजा की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई मूर्ति या पंडित जरूरी नहीं होता। व्रती सीधे प्रकृति यानी सूरज, नदी या तालाब के पानी, फल और सूप-दौरा के साथ पूजा करते हैं।
छठ पूजा की कहानी और मान्यताएँ
छठ पूजा से जुड़ी कई कथाएँ प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, भगवान राम और माता सीता जब वनवास से लौटे, तो उन्होंने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की पूजा की थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
दूसरी कथा महाभारत से जुड़ी है। कहा जाता है कि कुंती पुत्र कर्ण रोज सुबह कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे। वहीं द्रौपदी ने भी अपने परिवार की मुश्किलें दूर करने के लिए यह व्रत रखा था।
एक और कथा राजा प्रियंवद की है, जिन्हें संतान नहीं थी। यज्ञ के बाद उन्हें पुत्र हुआ, पर वह जन्म से ही निर्जीव था। तब देवी षष्ठी प्रकट हुईं और उनकी कृपा से बच्चा जीवित हो गया। इसी वजह से छठी मैया को संतान की रक्षक माना जाता है।
छठ पूजा कब और कितने दिन की होती है?
छठ पूजा चार दिन तक चलती है। यह चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक चलती है। हर साल इसकी तारीख दिवाली के बाद पंचांग के हिसाब से बदलती रहती है, इसलिए पूजा की सही तारीख और अर्घ्य का समय आप अपने शहर के पंचांग में जरूर देख लें।
कई लोग साल में दो बार भी छठ करते हैं: एक कार्तिक में और दूसरी चैत्र महीने में, जिसे चैती छठ कहते हैं। लेकिन कार्तिक छठ सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।
छठ पूजा 2026 कब है? जानिए सही तारीख
साल 2026 में छठ पूजा 13 नवंबर से 16 नवंबर तक मनाई जाएगी। इसकी मुख्य तिथि 15 नवंबर, रविवार है, जो कार्तिक शुक्ल षष्ठी का दिन है। चार दिन के इस महापर्व की तारीखें ये हैं:
- नहाय खाय (पहला दिन): 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
- खरना (दूसरा दिन): 14 नवंबर 2026, शनिवार
- संध्या अर्घ्य यानी डूबते सूरज को अर्घ्य (तीसरा दिन): 15 नवंबर 2026, रविवार
- उषा अर्घ्य यानी उगते सूरज को अर्घ्य और पारण (चौथा दिन): 16 नवंबर 2026, सोमवार
अर्घ्य का समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है। जैसे दिल्ली में 15 नवंबर को सूर्यास्त करीब शाम 5:27 बजे और सूर्योदय करीब सुबह 6:43 बजे रहेगा। इसलिए घाट पर जाने से पहले अपने शहर का सही समय स्थानीय पंचांग में जरूर देख लें।
छठ पूजा कैसे करें: चार दिन की पूरी विधि
अब आते हैं सबसे जरूरी सवाल पर: छठ पूजा कैसे करें? नीचे चारों दिन की विधि सरल शब्दों में दी गई है।
पहला दिन: नहाय खाय
छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से होती है। इस दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर नदी, तालाब या घर में गंगाजल मिले पानी से स्नान करते हैं। इसके बाद पूरे घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है, क्योंकि छठ में पवित्रता सबसे ज्यादा मायने रखती है।
इस दिन व्रती सिर्फ एक बार सात्विक भोजन करते हैं। आमतौर पर कद्दू (लौकी) की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल बनता है। खाना मिट्टी के चूल्हे या साफ गैस पर बनाया जाता है और उसमें लहसुन-प्याज बिल्कुल नहीं डाला जाता।
दूसरा दिन: खरना
दूसरे दिन को खरना कहते हैं। इस दिन व्रती सुबह से शाम तक बिना पानी पिए उपवास रखते हैं। शाम को सूरज ढलने के बाद गुड़ की खीर (रसियाव) और रोटी बनाई जाती है। इसी को खरना का प्रसाद कहा जाता है।
पहले छठी मैया को भोग लगाया जाता है, फिर व्रती उसे ग्रहण करते हैं। उसके बाद परिवार और आसपास के लोग प्रसाद लेते हैं। इस प्रसाद को खाने के बाद ही व्रती का 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू होता है।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
तीसरा दिन छठ पूजा का मुख्य दिन होता है। सुबह से घर में ठेकुआ, चावल के लड्डू और बाकी प्रसाद तैयार किया जाता है। शाम को परिवार के लोग बांस की टोकरी या सूप में सारा प्रसाद और फल सजाकर घाट पर जाते हैं।
घाट पर व्रती कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देते हैं। सूप में रखा प्रसाद हाथ में लेकर दूध और जल चढ़ाया जाता है। घाट पर दीये जलते हैं, छठ के गीत गूंजते हैं, और माहौल बहुत सुंदर और भक्ति से भरा होता है। रात में कई घरों में कोसी भरने की परंपरा भी निभाई जाती है।
चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण
चौथे दिन सुबह सूरज निकलने से पहले ही व्रती घाट पर पहुँच जाते हैं। उगते सूरज को अर्घ्य देने के बाद छठ पूजा पूरी मानी जाती है। इसके बाद व्रती घाट पर ही प्रसाद बांटते हैं, फिर घर आकर कच्चे दूध या शरबत और प्रसाद से अपना व्रत खोलते हैं। इसे पारण कहा जाता है।
छठ पूजा प्रसाद Ingredients: पूरी सामग्री लिस्ट
छठ पूजा का प्रसाद बनाने में बहुत शुद्धता रखी जाती है। प्रसाद नहाकर, साफ कपड़े पहनकर और बिना जूठा किए बनाया जाता है। नीचे छठ पूजा प्रसाद के Ingredients यानी सामग्री को हिस्सों में बांटकर बताया गया है।
ठेकुआ बनाने की सामग्री (Thekua Ingredients)
ठेकुआ छठ पूजा का सबसे खास प्रसाद है। इसके लिए ये चीजें चाहिए:
- गेहूं का आटा: 2 कप
- गुड़ या चीनी: आधा से एक कप (स्वाद के अनुसार)
- देसी घी: 4 से 5 बड़े चम्मच (मोयन के लिए)
- सूखा नारियल (कद्दूकस किया हुआ): 2 से 3 बड़े चम्मच
- सौंफ और इलायची पाउडर: थोड़ा सा
- तलने के लिए घी या तेल
- पानी: आटा गूंधने के लिए
गुड़ को थोड़े पानी में घोलकर छान लें, फिर उसी पानी से आटा गूंधें। आटा थोड़ा कड़ा रखें, छोटी लोई बनाएं, सांचे या कांटे से डिजाइन बनाएं और धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तल लें।
खरना के प्रसाद की सामग्री
- अरवा चावल: 1 कप
- दूध: 1 लीटर
- गुड़: स्वाद के अनुसार
- आटा और घी: रोटी बनाने के लिए
- केले के पत्ते या साफ बर्तन
चावल को दूध में पकाकर उसमें गुड़ डालें। यही रसियाव या गुड़ की खीर है। इसे घी लगी रोटी के साथ परोसा जाता है।
चावल के लड्डू (कसार) की सामग्री
- चावल का आटा: 1 कप
- गुड़ या चीनी: आधा कप
- घी: 2 से 3 बड़े चम्मच
- इलायची पाउडर
आटे को घी में हल्का भून लें, उसमें गुड़ की चाशनी मिलाएं और गर्म रहते ही लड्डू बना लें।
फल और सूप में रखी जाने वाली चीजें
छठ पूजा के प्रसाद में फल भी बहुत जरूरी हैं। सूप या दौरा में ये चीजें रखी जाती हैं:
- केला (पूरा घौद)
- नारियल
- गन्ना (साबुत, कम से कम 2 से 5 डंडे)
- सेब, संतरा, अनार, नाशपाती
- सिंघाड़ा और अदरक का पौधा
- हल्दी की गांठ
- नींबू (बड़ा वाला डाभ नींबू) और सुथनी
- मूली और कच्चा सिंदूर
- मेवे जैसे बादाम और काजू
पूजा की बाकी जरूरी सामग्री
- बांस का सूप, दौरा और डगरा
- मिट्टी के दीये और घी या तेल
- रोली, चंदन, अक्षत (चावल) और सिंदूर
- धूप, अगरबत्ती और कपूर
- पीला या लाल कपड़ा, नए वस्त्र
- आम की लकड़ी, मिट्टी का चूल्हा (खरना के लिए)
- दूध और गंगाजल अर्घ्य के लिए
- फूल और माला
इन सब Ingredients को पहले से इकट्ठा कर लेना अच्छा रहता है, ताकि पूजा के दिन भागदौड़ न हो।
छठ पूजा के जरूरी नियम
छठ पूजा में कुछ बातों का खास ध्यान रखा जाता है:
- घर और पूजा की जगह की साफ-सफाई सबसे पहले।
- प्रसाद बनाते समय लहसुन, प्याज और मांसाहार से पूरी तरह दूरी।
- प्रसाद को बिना नहाए न छुएं और न चखें।
- व्रती जमीन पर सोते हैं, और कई लोग पूरे चार दिन सादा जीवन जीते हैं।
- अर्घ्य देते समय सूप को साफ और सजा हुआ रखें।
- पूजा में सच्चा मन और श्रद्धा सबसे जरूरी है, दिखावा नहीं।
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा का धार्मिक महत्व तो है ही, इसका सामाजिक और सेहत से जुड़ा पक्ष भी बहुत खास है। इसमें अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं रहता। सब लोग एक ही घाट पर, एक जैसे सूप और एक जैसे प्रसाद के साथ खड़े होते हैं।
सुबह और शाम के समय सूरज की हल्की रोशनी शरीर के लिए अच्छी मानी जाती है। व्रत से शरीर और मन दोनों को अनुशासन सीखने का मौका मिलता है। साथ ही, नदी-तालाब की सफाई और प्रकृति के प्रति आभार भी इस पर्व का हिस्सा है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जो हमें जीवन देता है, उसका धन्यवाद करना कितना जरूरी है।
आखिर में
छठ पूजा सादगी, पवित्रता और भरोसे का त्योहार है। नहाय खाय से लेकर उषा अर्घ्य तक हर दिन का अपना महत्व है। अगर आप पहली बार छठ पूजा कर रहे हैं, तो घबराएं नहीं। पूजा की विधि समझ लें, छठ पूजा प्रसाद की सामग्री (Ingredients) पहले से तैयार रखें और घर के बड़े-बुजुर्गों से सलाह लेते रहें। सच्चे मन से की गई पूजा से छठी मैया और सूर्य देव जरूर प्रसन्न होते हैं।
आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय छठी मैया!
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