What is DLS Method in Cricket : मैच के बीच में बारिश आ जाए और ओवर कम हो जाएं, तो स्कोरबोर्ड पर अचानक एक नया टारगेट दिखने लगता है। कई दर्शकों को समझ नहीं आता कि यह 187 या 143 जैसा अजीब आंकड़ा कहां से आया। इसके पीछे DLS method है। इस लेख में जानिए कि DLS method क्या है, यह कैसे काम करता है और बारिश वाले मैच में नतीजा किस आधार पर तय होता है।
DLS Method क्या है?
DLS का पूरा नाम डकवर्थ-लुईस-स्टर्न मेथड है। यह एक गणित का तरीका है, जो सीमित ओवरों वाले मैच (वनडे और T20) में बारिश या किसी और रुकावट के बाद दूसरी टीम का नया लक्ष्य तय करता है। रुकावट की वजह से ओवर घट जाएं, तो दोनों टीमों को बराबर मौका देने के लिए यही तरीका इस्तेमाल होता है।
टेस्ट क्रिकेट में इसका इस्तेमाल नहीं होता, क्योंकि वहां मैच ओवरों से नहीं, दिनों और पारियों से तय होता है।
यह नियम बना कैसे?
पहले बारिश वाले मैचों में एवरेज रन रेट जैसे तरीके चलते थे। इनमें सिर्फ रन और ओवर देखे जाते थे, विकेट का कोई हिसाब नहीं होता था। इससे कई बार नतीजे अटपटे निकलते थे।
इस कमी को दूर करने के लिए दो अंग्रेज सांख्यिकीविदों (Statisticians), फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस, ने नया तरीका बनाया। वनडे में इसका पहला इस्तेमाल 1997 में हुआ और 1999 में इसे औपचारिक रूप से अपनाया गया। उनके रिटायर होने के बाद स्टीवन स्टर्न इस तरीके के संरक्षक बने। नवंबर 2014 में इसका नाम बदलकर डकवर्थ-लुईस-स्टर्न किया गया, और स्टर्न ने इसे आज के तेज स्कोरिंग वाले क्रिकेट, खासकर T20, के हिसाब से सुधारा।
इसका मूल विचार: दो संसाधन
DLS इस सोच पर टिका है कि बल्लेबाजी करने वाली हर टीम के पास दो चीजें होती हैं: खेलने के लिए ओवर और बचे हुए विकेट। इन्हीं दोनों को मिलाकर “रिसोर्स” यानी संसाधन कहा जाता है।
50 ओवर के वनडे में एक टीम के पास पारी की शुरुआत में 300 गेंदें और 10 विकेट होते हैं। पारी की शुरुआत में टीम के पास 100% संसाधन माने जाते हैं। जैसे-जैसे ओवर फेंके जाते हैं और विकेट गिरते हैं, यह प्रतिशत घटता जाता है।
इसमें विकेट की अहमियत समझना जरूरी है। मान लीजिए दो टीमें 40 ओवर के बाद खेल रही हैं। एक के तीन विकेट गिरे हैं और दूसरी के आठ। तीन विकेट वाली टीम के पास बचे हुए ओवरों में तेज रन बनाने की ज्यादा गुंजाइश है, क्योंकि उसके पास खुलकर खेलने वाले बल्लेबाज बचे हैं। DLS इसी फर्क को गिनती में लेता है।
इसी वजह से DLS के हिसाब से पूरे 50 ओवर खेलना और ऑल आउट हो जाना, दोनों में टीम अपने सारे संसाधन इस्तेमाल कर चुकी मानी जाती है।
DLS में टारगेट कैसे बदलता है?
बुनियादी गणित यह है कि टारगेट दोनों टीमों के संसाधनों के अनुपात के हिसाब से बदलता है।
पहली टीम के पास पूरे संसाधन थे, यानी उसे अपने सभी ओवर मिले। अब मान लीजिए बारिश की वजह से दूसरी टीम के ओवर घट गए। तब दूसरी टीम के पास पहली टीम से कम संसाधन हैं, इसलिए उसका टारगेट भी कम होगा।
एक काल्पनिक उदाहरण (आंकड़े सिर्फ समझाने के लिए हैं, असली मैच में डकवर्थ-लुईस की आधिकारिक तालिका या सॉफ्टवेयर से संसाधन निकलते हैं):
- पहली टीम ने 50 ओवर में 250 रन बनाए।
- बारिश की वजह से दूसरी टीम को सिर्फ 40 ओवर मिले।
- मान लीजिए 40 ओवर और 10 विकेट के संसाधन तालिका में पहली टीम के संसाधनों का 80% हैं।
- तब दूसरी टीम का लक्ष्य लगभग 250 का 80%, यानी 200, के आसपास रहेगा, और जीतने के लिए उसे इससे एक रन ज्यादा बनाना होगा।
अगर दूसरी टीम के पास पहली टीम से ज्यादा संसाधन हों, जैसे पहली टीम की पारी बारिश से छोटी हो गई हो, तो टारगेट बढ़ा दिया जाता है।
पार स्कोर क्या होता है?
कई बार बारिश के बाद खेल दोबारा शुरू ही नहीं हो पाता। तब नतीजा तय करने के लिए पार स्कोर देखा जाता है।
पार स्कोर वह स्कोर है जो रुकावट के समय दूसरी टीम का, बचे हुए विकेट देखते हुए, कम से कम होना चाहिए, ताकि वह बराबरी पर माना जाए। यानी पार स्कोर एक तरह से बताता है कि दूसरी टीम उस समय बराबरी पर होती तो कितने रन होने चाहिए थे।
- दूसरी टीम का स्कोर पार स्कोर से ज्यादा हो, तो वह टीम जीतती है।
- बराबर हो, तो मैच टाई माना जाता है।
- कम हो, तो वह हार जाती है।
टारगेट और पार स्कोर में एक अंतर है। टारगेट एक तय संख्या होती है, जबकि पार स्कोर विकेट गिरने के साथ बदलता रहता है। एक ही ओवर पर पार स्कोर इस पर निर्भर करता है कि टीम के कितने विकेट गिर चुके हैं।
बारिश कब आती है, उस पर क्या होता है?
रुकावट के समय के हिसाब से स्थिति अलग-अलग होती है:
पहली पारी के दौरान बारिश आए। अगर पहली टीम की पारी छोटी करनी पड़े, तो उसके ओवर घटा दिए जाते हैं। दूसरी टीम का टारगेट बाद में, पहली टीम के कुल स्कोर और दोनों टीमों के संसाधनों को देखकर तय होता है।
दूसरी पारी के दौरान बारिश आए। खेल दोबारा शुरू हो सके तो ओवर घटाकर नया टारगेट तय होता है। शुरू न हो सके तो पार स्कोर से नतीजा निकलता है।
बारिश से पहले ही मैच छोटा हो जाए। अगर मैच शुरू होने से पहले ही ओवर घटा दिए गए हों, तो दोनों टीमों को बराबर ओवर मिलते हैं और आम तौर पर DLS की जरूरत नहीं पड़ती।
नतीजे के लिए कम से कम कितने ओवर जरूरी हैं?
मैच का नतीजा निकालने के लिए हर टीम को कुछ न्यूनतम ओवर खेलने का मौका मिलना जरूरी होता है। यह संख्या टूर्नामेंट के नियमों पर निर्भर करती है। आम तौर पर वनडे में यह हर पारी के लिए 20 ओवर और T20 में 5 ओवर रखी जाती है, लेकिन कुछ टूर्नामेंट, खासकर नॉकआउट मैचों में, ज्यादा ओवर की शर्त रख सकते हैं। किसी खास मैच में कितने ओवर जरूरी थे, यह उस टूर्नामेंट के नियमों में देखना चाहिए।
नतीजा DLS से तय हुआ हो, तो स्कोरकार्ड में इसे लिखा जाता है, जैसे “टीम 2 ने 11 रन से जीत दर्ज की (DLS मेथड)।”
DLS की आलोचना क्यों होती है?
यह तरीका पुराने तरीकों से बेहतर माना जाता है, फिर भी इस पर सवाल उठते रहे हैं:
- गणित जटिल है। गणना सॉफ्टवेयर से होती है, इसलिए आम दर्शक के लिए इसे समझना मुश्किल रहता है।
- टारगेट अटपटा दिख सकता है। कभी-कभी टारगेट ऐसा लगता है कि उसे बनाना कठिन या बहुत आसान है।
- मैच की स्थिति हर बार एक जैसी नहीं होती। तेज बल्लेबाजी वाले दौर में तालिका के आंकड़ों का असर अलग हो सकता है। इसी वजह से आंकड़ों को समय-समय पर सुधारा गया है।
- बारिश का समय खेल बदल सकता है। पहली पारी में कितने विकेट गिरे थे, इसका असर दूसरी टीम के हिसाब पर पड़ता है।
जरूरी बातें
- DLS में रन के साथ विकेट भी गिने जाते हैं, इसलिए यह एवरेज रन रेट से ज्यादा निष्पक्ष माना जाता है।
- संसाधन का मतलब बचे हुए ओवर और बचे हुए विकेट का मिला-जुला हिसाब है।
- टारगेट एक तय संख्या है और पार स्कोर विकेट के हिसाब से बदलता रहता है।
- खेल दोबारा शुरू न हो सके, तो पार स्कोर से ज्यादा बनाने वाली टीम जीतती है।
- इसका इस्तेमाल सिर्फ वनडे और T20 जैसे सीमित ओवरों के मैच में होता है, टेस्ट में नहीं।
- न्यूनतम ओवर की शर्त टूर्नामेंट के नियम से तय होती है।
- गणना हाथ से नहीं, सॉफ्टवेयर से की जाती है, और मैच अधिकारी उसी के आंकड़े इस्तेमाल करते हैं।
- यह तरीका फ्रैंक डकवर्थ, टोनी लुईस और स्टीवन स्टर्न के नाम पर है।
DLS method क्या है?
DLS method में पार स्कोर क्या होता है?
क्या DLS method टेस्ट क्रिकेट में भी इस्तेमाल होता है?
DLS method का नाम किसके नाम पर है?
बारिश के बाद मैच का नतीजा निकालने के लिए कितने ओवर खेलना जरूरी है?
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